152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
का अन्य कोई उपाय नहीं होता। जो लोग इसे अनुभव करते हैं, उन्हें इस बात को समझने में कोई कठिनाई नहीं होगी। सभी धंधों के द्वार उनके लिए बंद होते हैं। उनके पास न तो भूमि होती है, जिनकी पैदावार पर वे जिंदा रहे सकें। वे कोई व्यापार भी नहीं कर सकते। अतः उनके जीवन का मुख्य आधार वह भोजन होता है, जो वे गांव वालों से एकत्र करते हैं। इसके अलावा तो सड़ा-गला मांस ही उनके लिए शेष रहता है। सड़े-गले मांस के अभाव में तो वस्तुतः भूखे ही मर जाएंगे। अतः यह स्पष्ट है कि दोष अस्पृश्यों का नहीं है। यदि वे सड़ा-गला मांस खाते हैं, तो उसका कारण यह है कि हिंदुओं ने रोजी-रोटी कमाने का कोई सम्मानजनक रास्ता उनके लिए छोड़ा ही नहीं है।
दूसरे प्रश्न का उत्तर भी उतना ही स्पष्ट है। यदि अस्पृश्य लोग हिंदुओं के मृत पशुओं को उठाते हैं और उनकी खाल उतारते हैं, तो उसका कारण यह है कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं होता। उन्हें विवश होकर ऐसा करना पड़ता है। यदि वे ऐसा करने से इंकार करते हैं तो उन पर जुर्माना किया जाता है। जुर्माना वैध है। कुछ प्रांतों में इस घिनौने काम को करने से इंकार करना ठेके को भंग करना है। अन्य प्रांतों में यह दंडनीय अपराध है और जुर्माना किया जा सकता है। बंबई जैसे प्रांतों में अस्पृश्य गांव के सेवक हैं। गांवों के सेवकों के रूप में उन्हें सरकार की सेवा करनी पड़ती है और हिंदुओं की भी। इस सेवा के बदले उन्हें जमीनें दी जाती हैं। वे उनमें
खेती करते हैं और उसकी उपज से अपनी जीविका चलाते हैं। अस्पृश्यों का एक कर्तव्य यह है कि वे गांवों में हिंदुओं के मृत पशुओं को उठाएं और उनकी खाल उतारें। यदि हिंदुओं के प्रति अस्पृश्य अपना कर्तव्य निभाने से इंकार कर दें, जो जिस भूमि से वे अपनी गुजर-बसर करते हैं, उसे जब्त किया जा सकता है। उन्हें दो में से एक को चुनना होता है कि या तो घिनौना कार्य करें या फिर भूखे मर जाएं।
संयुक्त प्रांत जैसे प्रांतों में जमादार यदि सफाई करने से इंकार कर दे, तो उसे अपराध माना जाता है। 1916 के संयुक्त प्रांत नगरपालिका अधिनियम II की धारा 201 में ये उपबंध हैंः
(क) यदि कोई जमादार जिसका किसी घर या भवन की घरेलू सफाई का प्रथागत
अधिकार है (इसमें इसके पश्चात् वह प्रथागत जमादार कहलाएगा),
उचित ढंग से ऐसी सफाई नहीं करता है, तो घर या भवन का निवासी
अथवा बोर्ड मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकता है।
(ख) मजिस्ट्रेट ऐसी शिकायत मिलने पर जांच कराएगा और यदि उसे दीख
पड़े कि प्रथागत जमादार ने समुचित ढंग से या उचित अंतराल पर घर
या भवन की सफाई नहीं की है, तो वे ऐसे जमींदार पर 10 रुपये तक