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सांझा राजस्व बजट

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1892-93 का संशोधन

पंचवर्षीय संशोधन नियम के अंतर्गत प्रांतीय बंदोबस्त का अगला संशोधन सन् 1892-93 में हुआ। उस वर्ष जो बंदोबस्त हुआ वह सैद्धांतिक रूप में उनसे भिन्न नहीं था जो सन् 1887-88 में हुआ था। संयत राजस्व में सांझेदारी का इस प्रकार पुनर्व्यवस्थापन किया गया था जिससे कि साम्राज्यवादी कोष को प्रांतीय संसाधनों की बढ़ती हुई प्राप्तियों से अधिकाधिक लाभ प्रदान किया जा सके। हिस्सेदारी के पुनर्व्यवस्थापन से साम्राज्यवादी सरकार को इस संशोधन से जो धन की पुनर्प्राप्ति होनी थी उसे निम्न तालिका में दर्शाया गया हैःµ

प्रांत सन् 1887-88 µ 1891-92 के करार भारत सरकार

के अनुमान की तुलना में द्वारा पुनप्रप्ति

सन् 1891-92 में राजस्व की धन राशि

वृद्धि संशोधित अनुमान

रु. रु. सी. पी. 119,200 22,700 लोअर बर्मा 334,900 58,900 बंगाल 517,700 51,900

उत्तर पश्चिम प्रांत 53,300 56,900 और अवध

पंजाब 195,400 41,000 मद्रास 313,200 103,800 बंबई 399,200 131,100 असम 99,800

योग 2,042,700 466,300

लेकिन साम्राज्यवादी कोष को प्राप्त इस फायदे ने अनुघटित होने वाली अवधि के प्रांतों के सामान्य आंके गए अनुमानित व्यय और उन पर छोड़े हुए सामान्य अनुमानित राजस्व के मध्य संतुलन को गड़बड़ा दिया। उनके सामान्य व्यय और सामान्य राजस्व के मध्य संतुलन कायम रखने के लिए भारत सरकार ने निश्चित समंजक आबंटन के त्याज्य तरीके को पुनः अपनाया ताकि बंदोबस्त के दौरान जबकि अनुमानित वास्तविक राजस्व और व्यय से जिन्हें सामान्य समझा गया था हट गई और साम्राज्यवादी सरकार द्वारा हर प्रांत को स्वीकृत समायोजित प्रविष्टि पूरी अवधि में निश्चित रही। विभिन्न प्रांतों के अनुमानित सामान्य व्यय और राजस्व का लेखा जो उनके समंजक आबंटन से संबंधित है और जो नई अवधि में निश्चित किया गया वह निम्न प्रकार हैःµ