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सांझा राजस्व बजट

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इन नतीजों पर विचार करते समय भारत सरकार द्वारा उसी दौरान प्रांतों को दी गई सहायता अनुदान के रूप में दी गई सुविधाओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यह सहायता अनुदान निम्न प्रकार पृष्ठ संख्या 196 पर थेःµ

लेकिन इस प्रकार की बख्शीश पर विचार करने से पूर्व यह नहीं समझ लेना चाहिए कि एक या दो मामले को छोड़कर वे प्रांतीय वित्त की देनदारी को बरकरार रखने के लिए आवश्यक थे जैसा कि विभिन्न प्रांतों के साथ बंदोबस्त की शर्तों में परिभाषित किया गया था। अभावों के अलावा भी विभिन्न प्रांतों के साथ जो राजस्व तय किया गया था उनकी आवश्यकताओं को देखते हुए काफी था अगर हम पिछले वर्षों को देखें और विचार किया जाए तो बहुत ही विशिष्ट वर्ष थे।

1912 का स्थाई बंदोबस्त

विभिन्न प्रांतों के साथ जैसे ही अर्द्धस्थाई बंदोबस्त की शृंखला समाप्त हुई, ब्रिटिश भारत के प्रांतीय और केन्द्रीय वित्त तथा उसी प्रकार के अन्य मामलों की विकेन्द्रीकरण संबंधी रायल आयोग द्वारा जांच पड़ताल की गई। इसकी सन् 1909 की रिपोर्ट में साम्राज्यवादी और प्रांतीय सरकारों के मध्य राजस्व और व्यय के निर्धारण की वर्तमान पद्धति को सिद्धांततः अनुमोदित किया गया। आयोग के समक्ष जो भी साक्ष्य हेतु गवाह प्रस्तुत हुए सबने भारी आलोचनाएं कीं लेकिन आयोग ने इनमें से मात्र दो साक्ष्य विचारणीय समझे (1) समंजक आबंटन और (2) सहायतानुदान अथवा खैरात जैसा कि उन्हें रूखे शब्दों से पुकारा जाता था। ऐसी मांग की गई जिसमें कुछ सच्चाई भी थी कि समंजक आबंटन प्रांतीय राजस्व के लचीलेपन को क्षति पहुंचाते हैं, क्योंकि इस तथ्य के कारण जहां खर्चे बढ़ते हैं, वहां नियतन द्वारा प्राप्त प्रांतीय संसाधन जो कुछ मामलों में उत्साहपूर्ण हिस्सा होते हैं अपरिवर्तित रहते हैं। दूसरे खैरात को अनैतिक करार दिया और यह कहा गया कि इन्हें वृद्धिशील राजस्व में हिस्सेदारी में परिवर्तित किया जाए। ऐसा लगता है कि आयोग पूरी तरह भारी मात्रा में समंजक आवंटन की

खामियों से प्रभावित था, लेकिन यह खैरात के विषय में और यह सही भी था, जो भी आलोचना हुई शंकालु था। हर किसी ने प्रांतों को विकेन्द्रीकरण के लाभों की प्रशंसा के पुल बांधे लेकिन थोड़े ही से उन कष्टों को समझ पाए जो भारत सरकार के हिस्से में थे। यह बहुत ही स्पष्ट था कि विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया द्वारा भारत सरकार ने प्रांतों को कमोबेश पूरी स्वतंत्रता दे रखी थी कि वे अपनी निधि में से किसी भी प्रकार का उन सेवाओं पर खर्च कर सकते हैं जिनके प्रबंध का उन्हें अधिकार प्रदान किया गया था। जबकि यह पूरी तरह कानूनन दक्षतापूर्ण अनुरक्षण के लिए