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202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सांझा राजस्व बजट

‘‘...स्थाई बंदोबस्त की जो अवधि थी वह समय प्रथम विश्व युद्ध का था, और अर्द्ध सामान्य घटनाओं ने प्रांतीय वित्त पर बहुत कुप्रभाव डाला। यदि स्थाई बंदोबस्त दीर्घावधि के लिए हुए होते तो परिस्थितियाँ भिन्न होतीं और सब कुछ सुलझ जाता।’’

µडॉ. भीमराव अम्बेडकर

...सन् 1896 और 1897 के अकाल ने सभी प्रांतों को कमोबेश मात्रा में प्रभावित किया। उत्तर पश्चिम प्रांत और अवध, मध्य प्रांत और बर्मा में अकाल की छाया का असर बहुत ही गंभीर था। मद्रास, बंगाल और पंजाब में यह चिंताजनक था। बर्मा में थोड़ा कम था। दूसरी ओर 1899 और 1900 का अकाल बंबई और मध्य प्रांत में बहुत गंभीर था।

पंजाब में बहुत चिंताजनक और शेष प्रांतों में इसका असर थोड़ा कम था। और असम यद्यपि इन दोनों ही अकालों के प्रभाव क्षेत्र से मुक्त था लेकिन सन् 1897 के जून में उसे भीषण भूकंप का सामना करना पड़ा। अकाल के साथ-साथ प्लेग ने भी भीषण तबाही मचाई और जन-धन की हानि हुई। इन अदृश्य प्राकृतिक प्रकोपों की रोकथाम की कार्यवाहियों पर सभी प्रांतों को असाधारण व्यय करने की मजबूरी झेलनी पड़ी जिसका बंदोबस्त के समय के निर्धारित मानक राजस्व में पहले से किसी भी प्रकार का प्रावधान नहीं किया गया था।

µडॉ. भीमराव अम्बेडकर