6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 207

192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जैसी कि आशा थी टकसालों को बंद कर देने से रुपये में आने वाली गिरावट रुक जाने से भारतीय वित्त व्यवस्था पर बोझ कम हो गया। यद्यपि कराधान में महत्वपूर्ण कमी की गई और सामाजिक उपयोगिता के कार्यों पर अधिक व्यय करने के बावजूद वार्षिक बजटों में कभी-कभी ही घाटा दिखाई दिया। (देखिए तालिका XXVII ) ख्1,

अब कुछ लेखकों में यह प्रवृत्ति है कि इससे वे यह दिखाना चाहते हैं कि यह मुद्रा प्रणाली की मजबूती का निर्विवाद प्रमाण है। यह तर्क दिया जाता है कि देश के व्यापार को कोई धक्का नहीं लगा ख्1, और देश की वित्तीय स्थिति सुधार गई है ख्2, तब इसका तात्पर्य यह निकलता है कि जिस मुद्रा के इतने अच्छे परिणाम निकलते हैं, वह अच्छी ही होगी। इसके लिए मुद्रा के विद्यार्थियों को सावधान करना जरूरी नहीं है कि मुद्रा प्रणाली की मजबूती के बारे में इतनी आसानी से राय बना लेना भले ही ऊपर से ठीक लगे, परंतु इसमें विश्वास पैदा करने वाले तर्क का अभाव है। व्यापार निस्संदेह अच्छी मुद्रा पर निर्भर करता है, परंतु व्यापार में वृद्धि इस बात का निश्चित प्रमाण नहीं होती कि मुद्रा अच्छी है। इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि हीन या आधारच्युत मुद्रा के जमाने में जब लोगों को इतनी अधिक असहनीय तकलीफें और परेशानी सहनी पड़ी तब भी इन देशों ने व्यापार में काफी प्रगति की थी। 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड में आधारच्युत मुद्रा थी और मुद्रा भी बराबर बदलती रहती थी और उन्हीं दिनों वहां गृह यृद्ध चल रहा था और अन्य गड़बडि़या भी फैली हुई थीं, उस समय की चर्चा करते हुए लार्ड लिवरपूल ने, जो उस जमाने के राजनैतिज्ञों में सबसे बुद्धिमान थे और खराब मुद्रा की बुराइयों को अच्छी तरह समझते थे, उन्होंने इसके बारे में निम्नलिखित टिप्पणी कीःµ

‘‘तथापि यह निश्चित है कि इस संपूर्ण अवधि में जब हमारी मुद्रा के बारे में इतना अधिक भ्रम फैला हुआ था हमारे राज्य की वाणिज्य व्यवस्था बराबर सुधर रही थी और व्यापार संतुलन लगभग सदा ही देश के पक्ष में रहा।’’ ख्3,

मुद्रा बुरी होने पर भी वाणिज्य की दशा बराबर सुधर सकती है। यह बात भारत के अपने अनुभव से भी पुष्ट की जा सकती है और किसी अवधि में भारत ने व्यापार में इतनी अधिक प्रगति नहीं की जितनी 1873 और 1893 की अवधि के बीच की। क्या उस अवधि की भारतीय मुद्रा अच्छी थी? दूसरी ओर, यह भी कहा जा सकता

  1. केन्स-पिछला उल्लेख, पृष्ठ 3

  2. बार्बर डी-4, स्टैंडर्ड ऑफ वैल्यू पृष्ठ 224

  3. ए. ट्रीटीज ऑन दि कॉयंस ऑफ दि रीएल्स (1880 का रिप्रिंट) पृष्ठ 135