सनातन धर्मार्थ हिंदू के लिए यह बुद्धि से बाहर की बात है कि छुआछूत में कोई दोष
है। उसके लिए यह सामान्य और स्वाभाविक बात है। वह इसके लिए किसी प्रकार के
पश्चाताप् और स्पष्टीकरण की मांग नहीं करता। आधुनिक हिंदू छुआछूत को कलंक तो समझता है लेकिन संघ के सामने चर्चा करने में उसे लज्जा आती है। शायद इससे कि
हिंदू सभ्यता विदेशियों के सामने बदनाम हो जाएगी कि इसमें दोषपूर्ण एवं कलंकित
प्रणाली या संहिता है जिसकी साक्षी छुआछूत है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर