अध्यायः 6
एक झूठा दावा
I
कांग्रेस बराबर ढोल पीट-पीट कर दावा करती रही है कि भारत में केवल कांग्रेस ही ऐसी राजनीतिक संस्था है, जो भारत की समस्त जनता का प्रतिनिधित्व करती है। एक समय था जब कांग्रेस दावा किया करती थी कि वह मुसलमानों का भी प्रतिनिधित्व करती है। परंतु अब वह ऐसा दावा नहीं करती। अब उसका जोशखरोश ठंडा पड़ गया है। परंतु जहां तक अस्पृश्यों का संबंध है, वह गला फाड़ कर अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करने का प्रचार करती है। दूसरी ओर, गैर-कांग्रेसी राजनीतिक दलों ने सदैव इस दावे का विरोध किया है और यह सच है कि अछूतों ने सदा कांग्रेस के इस दावे की बखिया उधेड़ी है।
इस प्रतियोगिता में कांग्रेस अछूतों को और अन्य गैर-कांग्रेसी दलों को अपनी शक्ति तथा जनता में प्रचार के माध्यम से पछाड़ने में सफल हो गई। इसका परिणाम यह रहा कि बहुत से विदेशी, जो भारतीय मामलों में रुचि रखते थे, इस प्रचार से गुमराह हुए और कांग्रेस के दावों पर विश्वास करने लगे। क्योंकि दुनिया केवल प्रचारकों पर विश्वास करती है, इसलिए कांग्रेस ने विदेशियों को बहुत आसानी से उल्लू बनाया और उन लोगों का कोई वश न चला, जिन्होंने कांग्रेस द्वारा सबका प्रतिनिधित्व करने के दावे को गलत बताया। क्योंकि उनके पास स्थिति से निपटने के कोई साधन नहीं थे। परंतु प्रांतीय विधान-मंडलों के लिए 1937 में हुए चुनावों से स्थिति बदल गई। प्रचार पर आधारित, सामान्य बयानों पर निर्भर रहने के बजाए, अब सीटों और मतों के आधार पर बातें होने लगीं, जो प्रचार से अधिक ठोस मूल्यांकन करने का साधन है।
अब यह देखना है कि सन् 1937 में हुए चुनाव से क्या स्पष्ट होता है और कांग्रेस ने कुल कितनी सीटें प्राप्त कीं?
पहले तो हमें कांग्रेस द्वारा प्राप्त की गई सीटों की संख्या निश्चित तौर पर ज्ञात