6. एक झूठा दावा - Page 187

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तालिका 13 से स्पष्ट हो जाता है कि अस्पृश्यों ने उनके लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव में कितनी दिलचस्पी दिखाई थी। 151 सीटों में से 121 पर चुनाव लड़े गए थे। इससे यह आरोप गलत सिद्ध हो जाता है कि अस्पृश्यों को राजनैतिक अधिकार देने में कोई फायदा नहीं है, क्योंकि न तो उन लोगों में राजनैतिक शिक्षा है और न राजनैतिक चेतना ही। तालिका 14 से स्पष्ट हो जाता है कि इन्होंने कांग्रेस को अपना मित्र समझने के बजाए उन्हें अपना पहले दर्जे का राजनीतिक शत्रु माना है। उन्होनें चुनाव में अस्पृश्यों के लिए सुरक्षित सीटों पर कांग्रेस को मुश्किल से किसी अन्य को चुने जाने दिया। बहुत जगहों पर जहां कांग्रेस ने अस्पृश्यों के लिए आरक्षित किसी सीट पर किसी अस्पृश्य उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए खड़ा किया तो अस्पृश्यों ने वह सीट चुपचाप कांग्रेस को नहीं दे दी। वरन् गैर-कांग्रेसी टिकट पर अपना उम्मीदवार खड़ा कर चुनाव लड़ा। अस्पृश्यों की सीटों के लिए कांग्रेस ने जो 78 उम्मीदवार खड़े किए थे उनमें से 64 सीटों पर मुकाबले हुए।

IV

यह कहना कि 1937 के चुनाव में अस्पृश्यों के बीच कांग्रेस जीती एक गलत बयानी है। वास्तव में अस्पृश्यों ने ही कांग्रेस को पछाड़ दिया। यदि बहुत से लोग इसे मानने को तैयार नहीं, तो शायद इसका कारण उनकी यह जानने की अनिच्छा या उनकी अनभिज्ञता होगी कि चुनावों में कांग्रेस के मुकाबले अस्पृश्यों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। वे कठिनाइयां वास्तविक थीं और बहुत थीं। उनका सविस्तार वर्णन करना उचित होगा, ताकि लोग यह जान सकें कि अस्पृश्य कितने साहस और लगन के साथ यह सिद्ध करने के लिए लड़े कि वे कांग्रेस से स्वतंत्र हैं और कांग्रेस उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती।

उन कठिनाइयों को दो शीर्षों में बांटा जा सकता हैः

  1. संगठनात्मक, और

  2. चुनाव प्रक्रिया संबंधी।

प्रथम शीर्ष के अंतर्गत दो बातों का मुख्यतया उल्लेख किया जा सकता है - पहला तो कांग्रेस की ओर अस्पृश्यों की साधन-संपन्नता के बीच के अन्तर का है। कांग्रेस संपन्न राजनीतिक दल है, इसमें दो राय नहीं। 1937 के चुनावों में कांग्रेस ने कितना धन खर्च किया उसका अभी तक कोई अनुमान नहीं लगाया गया। यदि जांच की जाए तो यह पता चल जाएगा कि कांग्रेस ने विज्ञापन, यातायात, साधनों पर और उन उम्मीदवारों के प्रचार में, जो कांग्रेस टिकट पर खड़े हुए थे, जो धन खर्च किया