नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 69

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वह इस शर्त पर कि वे शासक जातियां उनके अधीन होकर उन्हें सहयोग देने को तैयार हों। प्राचीन काल तथा मध्य काल में ब्राह्मणों ने क्षत्रियों अथवा सैनिक वर्ग से ऐसा संबंध जोड़ा और दोनों ने शासन किया। वास्तव में उन्होंने जनता को कुचल डाला-ब्राह्मणें ने अपनी कलम से और क्षत्रियों ने अपनी तलवार से। इस समय ब्राह्मण ने वणिक वर्ग को अपने साथ जोड़ लिया है, जिसे बनिया कहते हैं। क्षत्रियों से नाता तोड़ कर बनियों से संबंधा जोड़ना स्वाभाविक है। आज के व्योपार के युग में शस्त्र की अपेक्षा धन महत्वपूर्ण है। इस प्रकार नया नाता जोड़ने का यही मुख्य कारण है। दूसरा कारण राजनैतिक मशीनरी को गतिमान रखने के लिए धन की आवश्यकता है। धन केवल बनियों से मिल सकता है। यह केवल बनियां वर्ग ही है जो श्री गांधी के बनिया होने के कारण कांग्रेस को धन देता है। उस बनिया वर्ग को यह भी मालूम है कि राजनैतिक क्षेत्र में पैसा लगाने से उन्हें काफी लाभ मिलेगा। जिन लोगों को इसमें काफी संदेह हो वे पढ़े कि 6 जून 1942 को श्री लुई फिशर से श्री गाँधी की वर्ता हुई वार्ता क्या थी।ऽ वे श्री फिशर की ‘गांधी के साथ एक सप्ताह’ नामक पुस्तक के निम्न पैरा को पढ़ कर अपने संदेह को दूर कर सकते हैंः-

मैंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के विषय में मुझे श्री गांधी से कई प्रश्न पूछने थे। मुझे उच्च पदाधिकारी अंग्रेजों ने बतलाया था कि कांग्रेस धनी वर्ग के हाथों में खेल रही है, और बम्बई के उन करोड़पतियों का समर्थन श्री गांधी को प्राप्त है, जो मनचाहा धन उन्हें देते हैं। मैंने उनसे पूछा यह कहा तक सत्य है?´ उन्होंने साधारण ढंग से कहा-‘‘दुर्भाग्यवश वे ही कहते हैं। कांग्रेस के पास अपना कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। हमने आरंभ में सोचा था कि प्रत्येक कांग्रेसी सदस्य से चार आना वार्षिक चंदा एकत्र करेंगे और उससे अपना काम चलायेंगे। परंतु उससे काम नहीं चला। मैंने उनसे पूछा कि कांग्रेस बजट का कितना अनुपात अमीर भारतीयों द्वारा दिया जाता है? उन्होने उत्तर दिया-संपूर्ण बजट उदाहरणार्थ इस आश्रम में जितना हम खर्च करते हैं, उनसे कम धनराशी में हम गरीबी के साथ गुजर कर सकते थे। परंतु हम ऐसा नहीं करते और खर्च के लिए सारा धन हमारे धनवान मित्रों से मिलता है।य्

यही कारण है कि शासक जातियों की स्थिति से बनिया वर्ग को निकालना ब्राह्मण के लिए असंभव बात है। वास्तव में ब्राह्मणों ने बनिया वर्ग से केवल काम चलाऊ नहीं बल्की गहरा संबंध जोड़ रखा है। परिणाम यह है कि आजकल भारत में शासक जातियां ब्राह्मण-क्षत्रिय के बजाए ब्राह्मण-बनिया हैं।

ऽ ए वीक विद गांधा (1943) पृष्ठ 41)