राज्य और अल्पसंख्यक
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परिशिष्ट 4
जनसंख्या के आंकड़े
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1941 में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुमान 48,793,180 लगाया गया। क्या इस आंकड़े को सही माना जा सकता है?
इस मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
(i) 1931 के मुकाबले 1941 में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या में ह्रास हुआ है।
(ii) इसी अवधि में अन्य सभी समुदायों की जनसंख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई
है।
प्रश्न यह है कि क्या अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के ह्रास का कोई विशेष कारण है?
क्या 1931 में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के आकलन का आधार वही था, जो 1941 में था? इसका उत्तर हां में है। 1931 में आंकड़े, 1931 की जनगणना के आंकड़ों को लोथियन समिति द्वारा की गई ‘अस्पृश्यों’ की परिभाषा के अनुसार पुनर्व्यवस्थित करने के बाद प्राप्त किए गए थे। यही आधार 1941 की जनगणना का था। अतः यह नहीं कहा जा सकता कि 1941 में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या 1931 में अधिक अनुपात के कारण कम दिखाई देती है।
यह सही है कि 1941 की जनगणना में अजमेर - मेवाड़ और ग्वालियर राज्य की अनुसूचित जातियों की संख्या शामिल नहीं है। किन्तु इन दो क्षेत्रों के 1931 के आंकड़े, 1941 के आंकड़ों में जमा करने पर भी यह जनसंख्या 49,538,145 होती है, जो ह्रास ही दिखाती है।
एक ही दशक में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के कम होने और दूसरे समुदायों की जनसंख्या बढ़ने का कोई उचित स्पष्टीकरण न मिलने से यह धारणा ही मजबूत होती है, जो भारतीय जनगणना के प्रत्येक ईमानदार छात्र के मन में बनी है, अर्थात्कई दशकों से भारत में जनगणना का काम जनसंख्यिकीय काम नहीं रहा गया है। यह राजनीतिक मामला बन गया है। प्रत्येक समुदाय की अधिक से अधिक राजनीतिक शक्ति हाथ में लेने के उद्देश्य से दूसरे समुदायों की कीमत पर अपने समुदाय की जनसंख्या कृत्रिम तरीके से बढ़ा - चढ़ाकर दिखाने की प्रवृत्ति रही है। अनुसूचित जातियां की अन्य समुदायों ने अपने सम्मिलित लोभ की तुष्टि का शिकार बनाया जिन्होंने अपने प्रचारकों और गणनाकर्ताओं के माध्यम से जनगणना के काम और परिणाम को प्रभावित किया।
इन परिस्थितियों में यह मांग करना उचित है कि अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के सही आंकड़े को प्राप्त करने के लिए 1941 की जनसंख्या में अजमेर - मेवाड़ और ग्वालियर राज्य के आंकड़ों को जोड़कर जनसंख्या वृद्धि का सामान्य लाभ देते हुए उसमें 15 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।