साउथबरो कमेटी के समक्ष दिया गया साक्ष्य
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1 2 3 4 5 6 12. पूना 1,071,512 991,725 113,118 12.4 13.3 13. सतारा 1,081,278 1,028,176 144,688 13 14 14. शोलापुर 768,330 703,215 129,063 16.7 18 दक्षिणी डिवीजन 5,061,150 4,502,708 385,470 7.6 8.5 15. बेलगांव 943,820 817,797 83,199 8.8 10.1 16. बीजापुर 862,973 757,542 80,501 9 10.6 17. धारवाड़ 1,026,005 872,885 52,540 5 6 18. कनारा 430,548 383,624 10,767 2.4 2.9 19. कोलाबा 594,156 560,266 51,108 8.5 9.1 20. रत्नागिरी 1,203,638 1,110,594 107,354 8.9 9.7 सिंध
(ब्रिटिश जिले) 3,513,435 837,426 135,224 3.8 16
1911 की जनगणना के अनुसार बंबई प्रेसिडेंसी की कुल जनसंख्या (केवल ब्रिटिश जिलों की) 19,628,477 है। इसमें से अस्पृश्यों की जनसंख्या 1,627,980 है, जो कुल जनसंख्या का आठ प्रतिशत है। मान लें कि फिलहाल बंबई विधान परिषद में 100 निर्वाचित सदस्य होंगे। उसमें अस्पृश्यों के प्रतिनिधि के रूप में आठ प्रतिनिधि होने चाहिए। यदि प्रत्येक दो लाख की जनसंख्या के लिए एक प्रतिनिधि आबंटित कर दें (जो दो करोड़ की जनसंख्या के लिए 100 प्रतिनिधियों का अनुपात भर है), तो अस्पृश्य अधिकार के रूप में अपने लिए आठ प्रतिनिधियों की मांग कर सकते हैं। लेकिन बंबई प्रेसिडेंसी के अस्पृश्यों को कुल मिलाकर नौ सदस्य चुनने की अनुमति दी जा सकती है। एक अतिरिक्त सदस्य के निर्वाचन का औचित्य बाद में दिया जाएगा।
यदि उन्हें नौ सदस्य चुनने की अनुमति दी जाए तो उन्हें चुनने वाले निर्वाचन - क्षेत्र इस प्रकार होंगे :
बंबई नगर और सिंध प्रांत को छोड़कर प्रेसिडेंसी के विभिन्न जिलों का भाषायी आधार पर एक साथ समूहीकरण आगे दिए गए आकंड़ों के अनुसार किया जाना चाहिए :