व्यक्तिगत स्तर पर मैं यह स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मैं नही मानता कि इस देश में किसी विशेष संस्कृति के लिए कोई जगह हैं, चाहे वह हिंदू संस्कृति हो, या मुस्लिम संस्कृति, या कन्नड़ संस्कृति, या गुजराती संस्कृति। ये ऐसी चीजें हैं, जिन्हें हम नकार नहीं सकते, पर उनको वरदान नहीं मानना चाहिए, बल्कि अभिशाप की तरह मानना
चाहिए, जो हमारी निष्ठा को डिगाती हैं और हमें अपने लक्ष्य से दूर ले जाती हैं। यह
लक्ष्य है, एक ऐसी भावना को विकसित करना कि हम सब भारतीय हैं।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर