158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
महामहिम, वायसराय, दिल्ली के नुकटार्ट सेक्रेटरी से अधीक्षक, वाइसरीगल एस्टेट्स को भेजे गए पत्र संख्या 1031-ए, तारीख 25 फरवरी, 1920।
आपका पत्र संख्या 279-एम, दिनांक 20 फरवरी, 1920 मिला। मैं लाला दीवान चन्द को वायसरीगल, एस्टेटस, शिमला में स्टोर कीपर के पद पर परिवीक्षा आधार पर, एस. अमीर चन्द के स्थान पर जिन्होंने त्याग-पत्र दे दिया है, 1 जनवरी, 1920 से 6 माह के लिए रु. 50-5-70 के वेतनमान में नियुत्तQ करने की मंजूरी देता हूँ और उनसे 10 रुपये प्रतिमास की दर से उनकी जमानत की राशि 350 रुपये की वसूली करने के लिए प्राधिकृत करता हूँ।
करार-पत्र का बांड इसके साथ लौटाया जाता है।
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ऽसरकारी आवास-गृहों के आवंटन नियमों का संशोधन
1420. सरदार मंगल सिंह ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि यदि कोई अधिकारी दिल्ली से शिमला अथवा कलकत्ता स्थित सचिवालय विभाग को 1 अप्रैल, 1945 के बाद स्थानान्तरित किया जाता है तो क्या उसका दिल्ली को पुनः स्थानान्तरण होने पर उसकी पुरानी सेवा का उसे कोई लाभ नहीं मिल पाता तथा उसे क्वार्टर के आवंटन के प्रयोजन के लिए फिर से अपनी वरिष्ठता अर्जित करनी पड़ती हैः
(ख) इन कर्मचारियों को उन कर्मचारियों की तुलना में अर्ह तैनाती की मूल तारीख से वरिष्ठता का कोई लाभ नहीं मिल पाता जब लोक सेवा के हित में स्थानान्तरण के आदेश दिए जाते हैं_ और
(ग) चूँकि आवासीय गृहों की स्थिति शोचनीय है और प्रभावित व्यत्तिQ ऐसे हैं जिन्होंने कई वर्ष तक सरकारी नौकरी की है तथा जिनके परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक है, अतः क्या माननीय सदस्य इस निर्णय को निरस्त करने की आवश्यकता पर विचार करने का प्रस्ताव करते हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां।
(ख) इस आपत्ति का उद्देश्य यह था कि अपेक्षाकृत जूनियर व्यत्तिQयों को सहायता दी जाए जो दिल्ली में लगातार रह रहे हैं तथा जिन्होंने शिमला या दिल्ली में स्थित कार्यालयों की तुलना में दिल्ली में आवास गृहों की कठिन स्थिति के कारण अधिक कष्ट उठाए हैं।
ऽ वही, पृष्ठ 3163