अधिनियम द्वारा मान्य - Page 323

306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

IV. जिनके विरुद्ध संविदा प्रवर्तित नहीं हो सकती।

धारा 28

(i) जहां प्रतिफल छल कपट का साक्ष्य होने के बारे में सकलतः अनुपयुक्त है।

(ii) जहां अनुमति दुर्व्यपदेशन अनुचित व्यवहार या अन्य अधूरे वायदे के द्वारा प्राप्त की जाती है।

(iii) जहां अनुमति तथ्यात्मक भूल, भ्रांति या आश्चर्य के प्रभाव में दी जाती है।

विनिर्दिष्ट पालन और न्यायालय का विवेकाधिकार

विनिर्दिष्ट अनुतोष दिए जाने में महत्त्वपूर्ण विचार बिंदु हैं - न्यायालय कब विनिर्दिष्ट पालन किए अनुतोष प्रदान करने को बाध्य है? स्पष्टतः उन वादों में जहां विधि प्रावधानित करती है कि कोई विनिर्दिष्ट पालन अनुतोष प्रदान नहीं किया जाएगा जहां न्यायालय विनिर्दिष्ट पालन अनुतोष प्रदान नहीं कर सकता।

ऐसे वाद तीन वर्गों में आते हैंः-

(i) जहां संविदा की प्रकृति ऐसी है कि विधि उसका विशिष्टतः प्रवर्तित होना अनुज्ञात नहीं करती है।

(ii) जहां वादी ऐसा व्यक्ति है जिसके पक्ष में संविदा विशिष्टतः प्रवर्तित नहीं कराई जा सकती है।

(iii) जहां प्रतिवादी ऐसा व्यक्ति है जिसके विरुद्ध संविदा विशिष्टतः प्रवर्तित नहीं कराई जा सकती।

शेष निम्न तीन स्थितियों में संविदा विशिष्टतः प्रवर्तित हो सकती है -

(i) जहां संविदा (ऐसी प्रकृति - अनु) का है .........

(आगे के पृष्ठ नहीं मिले - संपादक)

उबेर्रमा फाइडिस - (भरपूर विश्वास)

संविदाएं जिनके बारे में कहा जाता है कि भरपूर विश्वास की अपेक्षा वे