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स्कूल के अछूत अध्यापक का नाम नहीं दिया गया। डॉक्टर का नाम भी नहीं दिया गया है। ऐसा अछूत अध्यापक के अनुरोध पर किया गया है जिसे प्रतिशोध का डर था। यह तथ्य अविवाद्य हैं।
किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है कि डॉक्टर ने पढ़े-लिखे होने के बावजूद थर्मामीटर लगाने और गम्भीर दशा में एक बीमार स्त्री का उपचार करने से मना कर दिया। डॉक्टर के उसका उपचार करने से मना करने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। डॉक्टर के पेशे पर लागू आचरण-संहिता को एक तरफ रखने पर भी उसकी आत्मा ने उसे नहीं कचोटा। हिन्दू एक अछूत को छूने के बजाए अमानुषिक बनना अधिक पसन्द करेगा।