पहली अनुसूची
(अनुच्छेद 1 और 4)
राज्य और भारत के राज्यक्षेत्र
* भाग 1
वे राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले-
मद्रास
बम्बई
पश्चिम बंगाल
संयुक्त प्रांत
बिहार
पूर्वी पंजाब
मध्य प्रांत और बरार
असम
उड़ीसा
के गवर्नर (राज्यपाल) प्रांत कहलाते थे।
* समिति ने इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार किया है कि क्या आंध्र का इस अनुसूची में एक पृथक राज्य के रूप में विनिर्दिष्ट तौर पर उल्लेख किया जाना चाहिए। हाल ही में सरकार ने इस विषय पर एक वक्तव्य दिया है जिसमें यह कहा गया था कि आंध्र को संविधान में प्रांतों में शामिल किया जा सकता है जैसा कि भारत शासन अधिनियम, 1935 में उड़ीसा और सिंध के बारे में किया गया था। तदनुसार एक प्रक्रम पर तो समिति आंध्र को अनुसूची में एक भिन्न जिला वर्णित करना चाहती थी। किन्तु संपूर्ण विचार करने पर समिति यह महसूस करती है कि अनुसूची में राज्य का उल्लेख मात्र करना और उसे नए संविधान के प्रारंभ से अस्तित्व में लाना पर्याप्त नहीं होगा। वर्तमान संविधान के अधीन तुरंत प्रारंभिक कदम उठाने होंगे ताकि शासन के संपूर्ण तंत्र के साथ एक नया राज्य नये संविधान प्रारंभ से अस्तित्व में आ जाए। उड़ीसा और सिंध के बारे में भी 1935 के अधिनियम में ऐसा ही किया गया था-वे 1 अप्रैल, 1936 से पृथक प्रांत बनाये गए थे जबकि अधिनियम 1 अप्रैल, 1937 को प्रवृत्त हुआ था। अतः समिति की सिफारिश है कि आंध्र के बारे में ही नहीं बल्कि अन्य भाषाई क्षेत्रों के बारे में रूपरेखा बनाने तथा इनके बारे में जांच करने के लिए एक आयोग नियुक्त किया जाए और उससे समय से अपनी रिर्पोट देने के लिए कहा जाए ताकि 1935 के अधिनियम की धारा 290 के अधीन नये राज्य बनाए जा सके जिन्हें बनाने की वह सिफारिश करे तथा इस संविधान के अंतिम रूप से अंगीकार किए जाने से पहले इसका उल्लेख अनुसूची में किया जा सके।