HI/Volume_3 - Page 13

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हमें यह लिखते हुए हर्ष हो रहा है कि डा.अम्बेडकर संपूर्ण वाडमय प्रायोजन का कार्य अनेक कठिनाइयों के बावजूद अबाध गति से आगे बढ रहा है। हमने बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के संपूर्ण वाडमय को हिंदी तथा भारतीय भाषाओं में अनूदित करते समय विषयानुसार श्री वसंत मून के अंग्रेजी संकलन को आधार तो बनाया है, किंतु सुविधा की दष्टि से उसे कुछ अधिक खंडो में समाविष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

अनुवाद कार्य अत्यंत कष्ट साध्य होता है तथा उसका पुनरीक्षण और संपादन उससे भी अधिक परिश्रम की अपेक्षा रखता है। हमारे समक्ष समय की सीमा भी है, यद्यपि पूरी प्रयोजना को दो-तील वर्षो में पूरा करने का संकल्प असंभव सा लगता है, फिर भी हमें अपने विद्वान अनुवादकों,पुनरीक्षकों तथा संपादन-सहयोगियो की क्षमता पर पूरा भरोसा है, जिनके अनवरत परिश्रम से हम इस कार्य को यथार्शीघ्र पूरा कर लेंगे।

हमारा अपने कपालु पाठको से पुनः निवेदन है कि वे इस अनुवाद को साहित्यिक अनुवाद की भांति नही, बल्कि ज्ञान - विज्ञान के सीधे-सीधे रूपांतर की तरह अपनाएंगे तथा बाबा साहेब के चिंतन को आत्मसात करेंगे।

हमने बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के अंग्रेजी लेखों एव भाषणों के दूसरे खंड को पाठकों की सुविधा को ध्यान में खरते हुए हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में तीन खंडों में विभाजित किया है। इन तीन खंडों के विषय हैः डा. अम्बेडकर - बंबई विधान-मडल में, साइमन कमीशन के साथ, गोलमेज सम्मेलन में।

हमने उपाधि स्वरूप प्रयक्त होने वाले अंग्रेजी के सर शब्द के स्थान पर माननीय शब्द का प्रयोग किया है। हमें आशा है, हमारे सहदय पाठक माननीय शब्द को उसी रूप में लेंगे। हमारा विश्वास है, इस खड को भी पाठकों का पूर्ववत प्यार मिलेगा।

डॉ. श्यामसिंह शशि

प्रधान संपादक