190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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(ख)
प्रेस (विशेष शक्तियाँ) विधेयक
माननीय सरदार वल्लभ भाई पटेलः महोदय, मैं प्रस्ताव रखता हूँः
कि विधेयक खण्ड-17 के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखा जाए, अर्थात्ः
‘‘1947 के अध्यादेश ग का निरसन
‘‘17, प्रेस (विशेष शक्तियाँ) (संख्या 2) अध्यादेश, 1947 को एतद्द्वारा निरसित किया जाता है।’’
माननीय उपाध्यक्ष : बाईं तरफ के शब्द पार्श्व टिप्पणी प्रतीत होते हैं। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री) : उन शब्दों को रखने की
आवश्यकता नहीं है।
** माननीय उपाध्यक्ष : माननीय मंत्री द्वारा यह प्रस्तावित किए जाने के बाद कि, विधेयक को यथा संशोधित पारित कर दिया जाए मैं इस संशोधन को लूंगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं आपकी अनुमति से पुनः
खण्ड-2 के बारे में प्रस्ताव रखता हूँ कि इस खण्ड में ‘‘कुछ’’ (समथिंग) शब्द के स्थान पर ‘‘कोई भी’’ (एनीथिंग) शब्द रखा जाए। इस शब्द के अधिक उचित होने के कारण इसी का प्रयोग होना चाहिए। इससे पूर्व भी संशोधन की बात हुई थी परन्तु मेरे माननीय मित्र ने प्रस्ताव ही नहीं रखा था।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : इसका कारण मेरा बहुत देर से आना था।
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* संसदीय सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड-1, भाग- II, 20 नवम्बर, 1947, पृ. 353
पृष्ठ 353
** संविधान सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड-1 भाग- II, 20 नवम्बर, 1947, पृष्ठ 355