229
से हिचके, उनका विश्वास है कि जब उनके हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ेगी, वे
अछूतों के प्रति हुई किसी भी गलत कार्रवाई में सुधार के लिए नहीं हिचकेंगे।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वह देखकर काफी आश्चर्यचकित हुए कि लंदन में गाधी जी के कुछ मित्र अनुसूचित जातियों के प्रति उनके रवैये को लेकर
काफी आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी राय में यदि अछूत हिन्दू
ही थे, तो भी उन्हें पृथक निर्वाचन क्षेत्र का अधिकार दिए जाने में कोई आपिŸा नहीं है। श्री एटली की भारतीय परिस्थितियों की जानकारी ने डॉ. अम्बेडकर को प्रभावित किया, उन्होंने सोचा कि प्रधानमंत्री इस बात को लेकर जागरुक थे कि
अनुसूचित जातियों के संबंध में ‘‘विचार किए जाने की आवश्यकता है’’।
उनका यह भी विचार था कि मि. चर्चिल यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत उत्साही और इच्छुक थे कि किसी भी तरह से बनाए जाने वाले संविधान में
अनुसूचित जातियों को सुरक्षा’ प्रदान की जाए।
* परिशिष्ट- VII देखें।
1ः दि बाम्बे क्रानिकल, दिनांक 9 नवम्बर, 194