232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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बहिष्कृत हितकारिणी सभा
डॉ. अम्बेडकर ने 9 मार्च, 1942 को दामोदरन हॉल, बम्बई में एक बैठक का आयोजन किया जिसका उद्देश्य एक ऐसे केंद्रीय संस्थान की स्थापना करना था जो अछूतों की शिकायतों को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा और पर्याप्त वाद-विवादों के पश्चात् केंद्रीय संस्थान की स्थापना हुई। उन्होंने संस्थान के लिए बहिष्कृत हितकारिणी सभा के नाम का प्रस्ताव किया जिसका समर्थन सभी के द्वारा किया गया। संस्थान की शपथ का निर्णय शिक्षित करें, संघर्ष करें और संगठित करें के रूप में किया गया जिसे सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया।
श्री सर चिमनलाल हरिलाल सीतलवाड एल.एल.डी. बहिष्कृत हितकारिणी सभा के अध्यक्ष बने और श्री नेयेर निस्सिम, जे.पी.उपाध्यक्ष थे। श्री रुस्तमजी जिनवाला, सॉलिसिटर, श्री जी.के. नारीमन, डॉ. आर.पी. परांजपे, डॉ. वी.पी. चव्हाण, श्री बी.जी. खेर, सॉलिसिटर समिति में शामिल किए गए थे। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर प्रबंध समिति के सभापति तथा श्री एस.एन. शिवतरकर, सचिव और श्री एन.टी. जाधव कोषाध्यक्ष थे। बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना 20 जुलाई 1924 को हुई और इसका पंजीकरण 1860 के अधिनियम XXI के अधीन हुआ।
इस संस्था की संरचना डॉ. अम्बेडकर ने की। संरचना का पाठ निम्न प्रकार है-संपादकगण
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बहिष्कृत हितकारिणी सभा
(सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अधीन पंजीकृत)
गठन के नियम
स्थापित
20 जुलाई, 1924
मुख्यालय
दामोदर हॉल, परेल
बम्बई-12