338 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रदान किया जाएगा जोकि, ब्रिटिश भारत के लिए अपनाए गए जनसंख्या के परिकलन के आधार पर 93 से अधिक नहीं होगा, लेकिन चयन की विधि परिमर्ष द्वारा निर्धारित की जाएगी। प्रारंभिक चरण में राज्यों का प्रतिनिधित्व संधिवार्ता समिति द्वारा किया जाएगा।
इसके बाद केबिनेट मिशन ने प्रस्ताव किया कि इस प्रकार चुने गए प्रतिनिधियों को यथा संभव षीघ्र नई दिल्ली में मिलना चाहिए। एक प्रारंभिक बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें सामान्य कार्यक्रम का निर्णय किया जाएगा, अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों का निर्वाचन किया जाएगा और नागरिकों, अल्प-संख्यकों, जन-जातियों और वर्णित क्षेत्रों की अधिकार संबंधी सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा। तत्पश्चात्, प्रांतीय प्रतिनिधि सारणी में दिखाए अनुसार भाग क, ख, ग में विभाजित हो जाएंगे। ये भाग, प्रत्येक भाग में षामिल प्रांतों के लिए प्रांतीय संविधानों के निर्णय की कार्रवाई करेंगे और यह निर्णय करेंगे कि क्या उन प्रांतों के लिए ग्रुप संविधान स्थापित करना चाहिए और यदि हां, तो कौन-से प्रांतीय विशयों पर ग्रुप को कार्रवाई करनी चाहिए। प्रांतों को ग्रुपों में से निकलने का अधिकार होना चाहिए। जैसे ही नई सांविधिक व्यवस्था प्रारंभ होगी, कोई भी प्रांत जिस ग्रुप में वह रखा गया था उससे बाहर निकलने का चुनाव कर सकता है। इस प्रकार का निर्णय प्रांत के विधान मंडल को नए संविधान के अंतर्गत प्रथम आम चुनाव के पष्चात् लेना चाहिए। भागों और भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों को संघ-संविधान का निर्णय करने के प्रयोजन से पुनः एकत्र होना चाहिए। संघ सविधान सभा में उपर्युक्त उल्लिखित संविधान के बुनियादी रुप से संबंधित उपबंधों में परिवर्तन या किसी प्रमुख समुदायों के उपस्थित और मतदान करने वाले प्रतिनिधियों के बहुमत की आवश्यकता होगी। सभा का सभापति यह निर्णय करेगा कि किस संकल्प ने प्रमुख सांप्रदायिक मुद्दा उठाया है और यदि किसी भी प्रमुख संप्रदाय के प्रतिनिधियों के बहुमत ने ऐसा निवेदन किया तो उसे अपना निर्णय देने ये पूर्व फेडरल न्यायालय से परामर्श करना होगा।
केबिनेट मिशन ने इसके अलावा प्रस्ताव किया कि नागरिकों, अल्पसंख्यकों और जनजातीय और वर्जित क्षेत्रों की अधिकार संबंधी सलाहकार समिति में प्रभावित पक्षों का सम्यक प्रतिनिधित्व होगा और उनका कार्य संघ संविधान सभा को मूलभूत अधिकारों, अल्पसंख्यकों की संरक्षा के लिए खंडों की सूची और जनजातीय और वर्जित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए योजना के बारे में रिपोर्ट करना होगा। और यह सलाह देनी होगी कि क्या इन अधिकारों को प्रांतीय, ग्रुप या संघ-संविधान में सम्मिलित किया जाए।
केबिनेट मिशन ने अंत में प्रस्ताव किय कि गवर्नर-जनरल प्रांतीय विधान मंडलों