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368 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वह संगठित नहीं कर सके। हमने ऐन वक्त पर यथा 29 अक्तूबर, 1936 को कांग्रेस के साथ समझौता किया और नामांकन पत्र 3 नवम्बर, 1936 तक भरे जाने थे। हम दलित वर्गों ने अपना आंदोलन काफी देर से शुरु किया है और अभी संगठन तैयार नहीं कर पाए हैं। लेकिन हाल में हुए चुनावों से प्राप्त अनुभव से यह पता चलाते है कि यदि हम अपना काम आमागी 5 वर्षों तक चलता रहें तो हम स्वतंत्र रुप से सफलता के साथ अगले चुनाव लड़ सकते हैं।

आप इलाहाबाद के बलदेव प्रसाद जायसवाल को जानते हैं। वह पटना आए हुए हैं और अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन करना चाहते हैं। यहां उन्होंने समाचार-पत्रों में दिया है कि सम्मेलन की अध्यक्षता दीवान बहादुर श्री निवासन करेंगे और आप सम्मेलन में उपस्थित होंगे। मुझे न सच मालूम है और न ही मैं उस व्यक्ति पर विश्वास करता हूं। पिछले वर्श लखनऊ में सम्मेलन का आयोजन हुआ था और श्री जायसवाल सम्मेलन के आयोजन के प्रमुख व्यक्ति थे। मैं लखनऊ सिर्फ आप से मिलने गया था लेकिन मुझे निराशा ही हाथ लगी। अब वह मेरी सहायता मांग रहे हैं लेकिन मैं उन्हें खुलेआम सहायता नहीं दे सकता और किसी भी प्रकार से कोई और सहायता नहीं कर सकता जब तक मुझे यह नहीं मालूम पड़ जाए कि आप सम्मेलन में भाग लेंगे। यह सम्मेलन 9, 10 और 11 अप्रैल, 1937 को आयोजित किया जाना है। बिहार का कोई व्यक्ति उनके साथ नहीं है। उनका यहां पर कार्यालय केथोलिक चर्च में स्थित है प्रत्येक चीज़ मिशनरियों द्वारा चालाकी से की जा रही हैं।

दलित वर्ग लींग की कार्य-समिति ने 15 अप्रैल और 15 मई, 1937 के बीच पटना में प्रांतीय सम्मेलन बुलाने का निर्णय किया है और इसने आपको आमंत्रित करने का भी निर्णय किया है। लेकिन यदि आप श्री जायसवाल के सम्मेलन में भाग लेने आ रहे हैं, जिसमें मुझे संदेह हैं, हम अपने सम्मेलन की तारीख 12 अप्रैल के आस-पास नियत कर लेंगे। यह पत्र मिलते ही क्या आप मुझे सूचित करेंगे कि आप श्री जायसवाल द्वारा आयोजित सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। एक बात और, वह एक सौ से अधिक दलित वर्गों को भी एकत्र नहीं कर पाएंगे। निसंदेह वे हज़ारों मुसलमानों और ईसाइयों को आमंत्रित कर सकते हैं, जैसा उन्होंने लखनऊ में किया था। मैं इस तरीके के सख्त खिलाफ हूं। हमें प्रामाणिक दलित वर्गो के सम्मेलन आयोजित करने चाहिए। आशा है आप मुझे अति शीघ्र उŸार देंगे।

सादर

आपका

( ह. ) जगजीवन राम