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‘‘बम्बई के नारे पार्क जी.आई.पी.आर. वर्कशॉप के सामने मैदान पर रविवार 28 दिसम्बर, 1952 को सायं 4 बजे ‘अछूतों के एक सम्मेलन का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि डॉ. अम्बेडकर इनको संबोधित करेंगे। तदनुसार अनुसूचित जाति फेडरेशन व मुंबई नगरपालिका कामगार संघ के सचिव श्री जे.जी. भाटनकर, महार जाति पंचायत संघ मुंबई के महासचिव एल.एफ. हिंदलेकर, अनुसूचित जाति सुधार-न्यास के सचिव एस. ए. उपश्याम तथा समता सैनिक दल के जे.ओ.जी., श्री एम. एस. सासालकर द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित एक पर्चा जारी किया गया।’’
मैदान में ‘अछूतों’ की भारी भीड़ जमा हुई। ठीक 5ः30 बजे शाम को डॉ. अम्बेडकर उपस्थित लोगों को संबोधित करने के लिए आए। ‘अछूतों’ ने नारे लगाकर तालियां बजाते हुए उनका स्वागत किया।
परिचय संबंधी औपचारिक टिप्पणियां करने के बाद उपश्याम ने डॉ. अम्बेडकर से सभा को संबोधित करने का अनुरोध किया।’’
औपचारिकताओं के पश्चात् उपश्याम ने- डॉ. अम्बेडकर से निवेदन किया कि वे श्रोताओं को संबोधित करें।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा, फिलहाल उनका पूरा ध्यान फेडरेशन भवन के सभागार बनवाने पर केंद्रित है। वे अगले सप्ताह दिल्ली लौटेंगे और कुछ दिनों तक वापिस नहीं आ सकेंगे। अतएव उन्हें कहा है कि धन संग्रह के कार्य में प्रगति संभव नहीं होगी। उन्होंने समाज के सदस्यों से दिल खोलकर दान देने की अपील की। उन्होंने आशा प्रकट की कि जनसाधारण इस मामले में सहायता करेंगे।
पिछले कुछ महीनों में 22,000 रुपए एकत्रित हुए थे। डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि सभागार का निर्माण बहुत आवश्यक है भले ही ऋण लेना पड़ा। लेकिन अब उन्होंने इरादा बदल दिया है और बताया कि चंदे की प्राप्ति धनराशि से ही सभागार का निर्माण कराया जाएगा।
1 जनता, 4 अक्तूबर, 1952