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हिंदुस्तान के इतिहास के बारे में गलतफहमियां प्रचलित हैं। कई विद्वान इतिहासकारों ने कहा है कि हिन्दुस्तान में राजनीति के बारे में कोई कुछ नहीं जानता था। प्राचीन भारतीयों ने केवल दर्शन, धर्म और आध्यात्म के बारे में लिखने पर ही अपना ध्यान

केन्द्रित किया था। इतिहास और राजनीति से वे पूरी तरह अलिप्त थे। कहा यह भी जाता है कि हिंदी जीवन और समाज, तय फौलादी घेरे में ही घूमता है और उस घेरे के वर्णन के साथ-साथ इतिहासकार का काम पूरा हो जाता है! प्राचीन हिंदुस्तान के इतिहास के अध्ययन के बाद मेरी राय इन विद्वानों की राय से अलग बनी है। इस

अध्ययन में मैंने पाया कि दुनिया के किसी भी देश में हिंदुस्तान जैसी गतिमान राजनीति

नहीं थी और शायद हिंदुस्तान ही एक मात्रा ऐसा देश है जहां ऐसी क्रांति हुई जैसी

दुनिया भर में अन्यत्रा कहीं नहीं हुई।

इतिहासकार शायद जिसे भूल चूके हैं ऐसी एक बुनियादी बात हिंदी इतिहास पढ़ने वाले छात्रों को ध्यान में रखनी होगी और वह है प्राचीन हिंदुस्तान में बौद्ध और ब्राह्मणों के बीच हुई लड़ाई। कुछ प्रोफेसरों ने कहा है कि, यह कोई दो पंथों के बीच हुई मामूली लड़ाई नहीं थी। यह सत्य के मायने ढूंढ़ने के लिए लड़ी गई लड़ाई थी।.....

(पृ. क्र.)

-डॉ. भीमराव अम्बेडकर