1. हिंदुत्व का दर्शन - Page 51

36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

8.277. उपरोक्त अपराध यदि कोई वैश्य-शूद्र करते हैं, तब उन्हें जबान

काटने की सजा छोड़कर शेष सभी प्रकार का दंड उनकी जाति के अनुसार

दिए जाएं, दंड का यह निर्धारित नियम है।

प्रहार या मार-पीट के अपराध के लिए मनु कहते हैंः

8.279. जिस अंग द्वारा नीच जाति व्यक्ति ऊंची जाति के व्यक्ति पर हमला

करेगा या उसे चोट पहुंचाएगा, उसका वह अंग काट लिया जाएगा। यह मनु

का अध्यादेश है।

8.280. जिसने दूसरे पर हाथ उठाया हो अथवा डंडा उठाया हो, तो उसका

हाथ काट दिया जाए और जो क्रोध में आकर किसी के लात मारता है,

उसका पैर काट दिया जाए।

अहंकार के अपराध के लिए-मनु कहता हैः

8.2.81. नीच जाति का कोई व्यक्ति यदि उच्च गति के व्यक्ति के साथ

उसी स्थान पर अभद्रता के साथ बैठेगा, तो उसके कूल्हे को दाग दिया

जाएगा तथा उसे देश-निकाला दे दिया जाएगा या राजा उसके निंतब पर

गहरा घाव करवा देगा।

8.282. यदि वह घमंड के साथ उस पर थूकता है, तो राजा उसके दोनों

होठों को_ यदि वह उस पर पेशाब करता है तो उसके लिंग को_ यदि वह

अपान वायु, छोड़े तो उसकी गुदा को कटवा देगा।

8.283. यदि वह ब्राह्मण को बालों से पकड़ता है या इसी तरह यदि वह

उसका पैर या गला या अंडकोश पकड़कर खींचता है तो राजा बिना किसी

हिचक या संकोच के उसके हाथों को कटवा दे।

व्यभिचार के अपराध के लिए-मनु कहता हैः

8.3.59. यदि कोई शूद्र किसी पुरोहित की पत्नी के साथ वास्तव में व्यभिचार

करता है, तो उसे मृत्यु-दंड मिलना चाहिए_ पत्नियों के मामले में सभी चारों

वर्णों की स्त्रियों की विशेष रूप से रखा की जानी चाहिए।

8.3.66. यदि कोई शूद्र किसी उच्च जाति की युवती से प्यार करता है, तो

उसे मृत्यु-दंड मिलना चाहिए_ परंतु यदि वह कोई समान वर्ग की कन्या से

प्यार करता है, तो उसे उस कन्या से शादी करनी होगी, बशर्ते उस कन्या

का पिता इसके लिए इच्छुक हो।

8.374. यदि कोई शूद्र किसी द्विज स्त्री के साथ संभोग करता है, चाहे वह