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बौद्ध धर्म की अवनति तथा पतन
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अंगे्रजी में लिखित ‘रिवोल्यूशन एंड
काउंटर-रिवोल्यूशन’ विषयक शोध के एक अंग के रूप में ‘दि
डिक्लाइन एंड फाल आफ बुद्धिज्म’ (बौद्ध धर्म की अवनति तथा
पतन) शीर्षक लेख लिखा था। उनके कागजों में उसके केवल पांच
पृष्ठ मिले, जिन्हें संशोधित भी नहीं किया गया था। डॉ. बाबासाहेब
अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को इस निबंध की प्रति
श्री एस. एस. रेगे से मिली, जिसमें डॉ. अम्बेडकर द्वारा यत्र तत्र अपनी
कलम से किए गए कुछ संशोधन मिलते हैं। अंगे्रजी में यह निबंध
अट्ठारह टंकित पृष्ठों में है - संपादक
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भारत से बौद्ध धर्म के लोप हो जाने पर उन सभी लोगों को अत्यधिक आश्चर्य होता है, जिन्होंने इस विषय पर कुछ चिंतन किया है और उन्हें इसकी ऐसी स्थिति देखकर दुख भी होता है। परंतु यह चीन, जापान, बर्मा, स्याम, इंडोचीन, श्रीलंका तथा मलाया द्वीप-समूह में कहीं-कहीं अभी भी विद्यमान है। केवल भारत में ही इसका अस्तित्व नहीं रहा है। भारत में केवल इसका अस्तित्व ही समाप्त नहीं हुआ, बल्कि बुद्ध का नाम भी अधिकांश हिंदुओं के दिमाग से निकल गया है। ऐसा कैसे हो गया, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। इस प्रश्न का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है। केवल यही बात नहीं है कि इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं है, बल्कि किसी भी व्यक्ति ने इसके संतोषजनक उत्तर को ढूंढने का प्रयास भी नहीं किया है। इस विषय पर विचार करते समय लोग एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंतर को भूल जाते हें। यह अंतर बौद्ध धर्म की अवनति और पतन के बीच का है। दोनों में अंतर रखना आवश्यक है। बौद्ध धर्म का पतन एक ऐसी बात है जो उन कारणों से भिन्न है, जिनसे इसकी अवनति हुई। पतन के कारण तो बिल्कुल स्पष्ट हैं, जब कि अवनति के कारण उतने स्पष्ट नहीं हैं।