भाग I
प्राचीन भारत में
क्रांति तथा प्रतिक्रांति
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने ‘रिवोल्यूशन एंड काउंटर-रिवोल्यूशन इन एनसिएंट इंडिया’ पुस्तक लिखने का इरादा किया था। विषय-सूची को अध्याय की तालिका में छापा गया है। इस मुख्य शीर्षक के अंतर्गत मूल रूप से उन्होंने सात पुस्तकें लिखने की योजना बनाई थी। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी उनके संग्रह में से कुछ पृष्ठ तथा कुछ अध्याय प्राप्त करने में सफल हो गई थी। इसलिए अध्याय अधूरे भी हैं। जांच करने के बाद कमेटी ने यह निर्णय किया कि अधूरी होने के बावजूद भी ‘रिवोल्यूशन एंड काउंटर-रिवोल्यूशन इन एनसिएंट इंडिया’ (प्राचीन भारत में क्रांति तथा प्रतिक्रांति) की उपलब्ध सामग्री को इस खंड में प्रस्तुत किया जाए। डॉ. अम्बेडकर बौद्ध धर्म के उदय को क्रांति मानते थे। ब्राह्मणों ने प्रतिक्रांति का मार्ग प्रशस्त किया। फलस्वरूप बौद्ध धर्म की अवनति तथा पतन हुआ।
अतः इस शीर्षक के अंतर्गत निम्नलिखित अध्याय शामिल किए गए हैंः
1. प्राचीन भारत के इतिहास पर प्रकाश
2. प्राचीन शासन प्रणालीः आर्यों की सामाजिक स्थिति
3. गर्त में डूबा पुरोहितवाद
4. सुधारक और उनकी नियति
5. बौद्ध धर्म की अवनति तथा पतन
6. ब्राह्मण साहित्य
7. ब्राह्मणवाद की विजयः राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म
8. हिंदू समाज के आचार-विचार-मनुस्मृति या प्रतिक्रांति का सिद्धांत
9. भगवत्गीता पर निबंधः प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टि (कृष्ण और उनकी
गीता)