ANNEXURE II 1373
होनी सर्वथा उचित है 22 और 15 तुरन्त कर ही देनी चाहिए यदि तत्काल 24 और 16 नियत करने में कोई विशेष कठिनाई हो । अति विशेष अवस्थाओं में सम्बन्ध-विच्छेद की अनुमति देना आवश्यक हो तो उसकी शर्तों को और अधिक कठोर बनाया जाए तथा 8,
10 वर्ष की ऐसी अवधि निश्चित की जाए जिसके भीतर नपुंसकता, पागलपन तथा कुष्ठ (कोढ़) इत्यादि के कारण भी सम्बन्ध विच्छेद की अनुमति न दी जाए । विषम विवाहों को दूर करने के लिए भी नियम बनाने आवश्यक हैं । गोद लेने के लिए पुरुष की आयु 25 वर्ष और स्त्री की आयु 21 वर्ष की अवश्य होनी चाहिये । पुत्रियों को दायभाग में वसीयतहीन मृत पिता की सम्पत्ति में पुत्रें के बराबर नहीं किन्तु चौथाई भाग मिलना चाहिये । हां पति की सम्पत्ति और माता के स्त्रीधन में से स्ति्रयों को विशेष अधिकार मिलना चाहिए । पुत्रियों को पैतृक अचल सम्पत्ति के उपभोग का अधिकार होना चाहिए, भाई के अतिरित्तफ़ अन्यों को बेचने तथा किराये पर देने का नहीं, इत्यादि संशोधन के लिए प्रयत्न करते हुए यदि हिन्दू कोड बिल का समान्यरुपेण समर्थन किया जाए तो यह समाज और देशहित की दृष्टि से मेरे विचार में सर्वथा उचित ही होगा । हिन्दू समाज की वर्तमान अवस्था शोचनीय है, उसका उद्धार अनेक आवश्यक सुधारों के बिना जिनमें जातिभेद को दूर करने का प्रमुख स्थान है संभव प्रतीत नहीं होता । आशा है विचारशील महानुभाव निष्पक्ष होकर इन विषयों पर गम्भीरता से विचार करेंगे ।
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