3. महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत - Page 131

किन्तु जब कोई व्यक्ति दो लोगों का ऋणी हो और पहला उस पर मुकदमा कर दे और तब दूसरा भी सामने आए और वह भी मुकदमा कर दे तो किस न्याय के तहत हम उस ऋण लेने वाले व्यक्ति की सारी जायदाद उस दूसरे ऋणदाता को दिलवा सकते हैं। उसे तो केवल इतना भर विश्वास दिलाया जा सकता है कि हमारे कानून के अनुसार शीघ्रता से उसके साथ पूरा न्याय किया जाएगा। यदि वह समर्थ हुआ तो उसे पूरा ऋण चुकाने को बाध्य किया जा सकता है और नहीं हुआ तो उस समय तक उसे जेल में भी बंद किया जा सकता है, जब तक वह उसे छुड़ाने को सहमत न हो जाए। ऐसी स्थिति आने पर हम यह मानते हैं कि उसे इससे संतोष हो जाएगा।

अंग्रेजी के खंड 1 में भारत के स्वतंत्र होने से पूर्व का जो अप्रामाणिक मानचित्र दिया गया है, उसे हम इस अध्याय के अंत में पाठकों की सुविधा के लिए उसी रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

संपादक