3. महाराष्ट्र : एक भाषावार प्रांत - Page 163

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

बनाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं हो सकता। और उद्देश्य हो भी क्या सकता है? जब तक बंबई महाराष्ट्र का हिस्सा बना रहे, तब तक तो मराठी - भाषियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि महाराष्ट्र का कौन सा हिस्सा किस प्रशासनिक क्षेत्र में मिला दिया जाए। किन्तु जब बंबई को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बृहत्तर बंबई बनाकर एक अलग प्रांत बनाने की बात उठी तो मराठी - भाषियों को अपने इलाकों से हाथ धोने की बात सहन नहीं हुई। अब देखना यह है कि बृहत्तर बंबई की योजना ने जो जिम्मेदारी राज्य पुनर्गठन आयोग पर डाली है, उसे वह कैसे निभाता है। क्या वह न्यायपूर्ण तरीके से मराठी भाषियों को इस बात के लिए बाध्य कर सकेगा कि वे न केवल गुजरातियों की इस मांग के आगे झुक जाएं कि वे बंबई का मोह त्याग दें, पर उनकी यह अगली मांग भी माने लें कि बंबई को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से अपने प्रांत के कुछ भू - भाग भी उन्हेंं समर्पित कर दें? आयोग को इस बारे में न्याय करना है। वह अपनी इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

  1. महाराष्ट्र और बंबई न केवल एक - दूसरे पर आश्रित हैं, वरन् वस्तुतः वे एक और अविभाज्य हैं। इन दोनों का पृथक्करण दोनों के ही लिए घातक होगा। बंबई के लिए पानी और बिजली महाराष्ट्र से आते हैं। महाराष्ट्र का बुद्धिजीवी वर्ग बंबई में बसा हुआ है। बंबई को महाराष्ट्र से काटकर अलग करने की बात बंबई के आर्थिक जीवन को अनिश्चित या संकटपूर्ण बना देगी, साथ ही इससे महाराष्ट्र की आम जनता अपने बुद्धिजीवी वर्ग से कट कर रह जाएगी। तब उसे मार्गदर्शन और नेतृत्व किससे मिलेगा? वह तो कहीं की न रहेगी।
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  1. कुछ लोगों ने इस तरह का सुझाव भी दिया है कि बंबई की समस्या का समाधान मध्यस्थता यानी पंच फैसले से होना चाहिए। मैंने कभी इससे बेहूदा सुझाव नहीं सुना था। ऐसा करना वैसी ही बेहूदगी होगी, जैसी किसी दांपत्य - जीवन संबंधी विवाद के मामले को पंच फैसले पर छोड़ना। दांपत्य - जीवन का गठबंधन तो अत्यंत वैयक्तिक मामला है, जिसे कोई तीसरा नहीं सुलझा सकता। बाइबिल की उक्ति का प्रयोग करूं तो कह सकता हूं कि बंबई और महाराष्ट्र को तो ईश्वर ने ही मिलाया है अर्थात् इन दोनों का जन्म - जन्मान्तरों का संबंध है। कोई भी मध्यस्थ इन्हें विलग नहीं कर सकता। अगर प्राधिकार है तो केवल आयोग को। यही अभिकरण इस बारे में निर्णय दे सकता है। देखें, वह क्या करता है।