162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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प्रतावित नए राज्य
1. मद्रास 50,170 3.00 तमिल 2. केरल 14,980 1.36 मलयालम 3. कर्नाटक 72,730 1.90 कन्नड 4. हैदराबाद 45,300 1.13 तेलुगु 5. आंध्र 64,950 2.09 तेलुगु 6. बंबई 151,360 4.02 मिश्रित 7. विदर्भ 36,880 0.76 मराठी 8. मध्य प्रदेश 171,200 2.61 हिन्दी 9. राजस्थान 132,300 1.60 राजस्थानी 10. पंजाब 58,140 1.72 पंजाबी 11. उत्तर प्रदेश 113,410 6.32 हिन्दी 12. बिहार 66,520 3.82 हिन्दी 13. पश्चिम बंगाल 34,590 2.65 बंगला 14. असम 89,040 0.97 असमिया 15. उड़ीसा 60,140 1.46 उडि़या 16. जम्मू व कश्मीर 92,780 0.14 कश्मीरी
महत्वपूर्ण बात राज्यों के आकार की तुलना है।
यदि जनसंख्या को मापदंड माना जाए तो परिणाम निम्नलिखित होगा :
आठ राज्य ऐसे हैं, जिनमें से प्रत्येक की जनसंख्या 1 और 2 करोड़ के बीच है।
चार राज्यों की जनसंख्या 2 और 4 करोड़ के बीच है।
एक राज्य की जनसंख्या 4 करोड़ से ऊपर है।
एक राज्य ऐसा है, जिसकी संख्या 6 करोड़ से ऊपर है।
इससे जो परिणाम निकलता है, वह विलक्षण है। स्पष्ट है, आयोग का यह विचार था कि राज्य के आकार का केई महत्व नहीं है ओर उन राज्यों के आकार की समानता का कोई महत्व नहीं, जिन्हें मिलाकर परिसंघ गठित होगा।
यही आयोग की पहली और सबसे भयंकर भूल थी, जिसको यदि समय रहते नहीं सुधारा गया तो वह भारत के लिए बहुत महंगी पड़ेगी।