168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
एक भाषा - भाषियों को एक ही राज्य के अधिकार क्षेत्र में रखा जाए। इसका यह अर्थ भी हो सकता है कि एक भाषा बोलने वाले लोगों को कई राज्यों में वर्गीकृत कर दिया जाए, बशर्ते कि प्रत्येक राज्य के अधिकार क्षेत्र में वे लोग रहें, जो एक ही भाषा बोलते हों। इनमें से कौन सी व्याख्या सही है?
आयोग का मत था कि एक ही भाषा बोलने वाले सभी लोगों के लिए एक ही राज्य का गठन एकमात्र नियम है, जिसका पालन किया जाए।
पाठक मानचित्र 1 पर दृष्टि डालें। उन्हें प्रथम दृष्टि में ही उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच असमानता दिखाई पड़ जाएगी। यह असमानता जबरदस्त है। छोटे राज्यों के लिए बड़े राज्यों का भार सहना असंभव हो जाएगा।
आयोग ने यह महसूस ही नहीं किया कि यह असमानता कितनी खतरनाक है। इसमें संदेह नहीं कि इस प्रकार की असमानता संयुक्त राज्य अमरीका में मौजूद है। लेकिन इससे जो हानि हो सकती थी, उसका परिहार संयुक्त राज्य के संविधान के उपबंधों से हो गया है।
संयुक्त राज्य के संविधान में ऐसे ही एक रक्षोपाय का निर्देश श्री पणिकर ने रिपोर्ट में अपने असहमति लेख में किया है (देखें सारणी 2)।
मैं नीचे उनके असहमति लेख का उद्धरण दे रहा हूं :
मैं संघ के सफल संचालन के लिए यह आवश्यक समझता हूं कि इकाइयों में समुचित
संतुलन बना रहे। यदि असमानता बहुत भारी हुई तो उससे न केवल संदेह और विद्वेष
पैदा होगा, बल्कि उससे ऐसी शक्तियों को बल मिलेगा, जिनसे न केवल संघीय ढांचे
ही को क्षति पहुंचेगी, वरन् देश की एकता भी खतरे में पड़ जाएगी। इस बात को सभी
ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। अधिकांश संघीय संविधानों में, जहां इकाई की
जनसंख्या और संसाधनों को लेकर व्यापक विभिन्नता मौजूद है, इस विषय में सावधानी
बरती गई है कि बड़े राज्यों के प्रभाव और प्राधिकार को सीमित रखा जाए। अतः यदि
संयुक्त राज्य अमरीका का ही उदाहरण लिया जाए तो हम देखते हैं कि यद्यपि वहां
के राज्यों में जनसंख्या और संसाधनों की दृष्टि से भारी अंतर है और न्यूयार्क राज्य की
जनसंख्या नवाडा की जनसंख्या से कई गुना अधिक है, लेकिन संविधान के अनुसार
सीनेट में प्रत्येक राज्य को समान प्रतिनिधित्व दिया जाता है।
इसी मुद्दे पर श्री पणिकर ने सोवियत संघ ओर प्राचीन जर्मनी का भी निर्देश किया है।
उनका कहना है :
सोवियत संघ में भी, जहां बृहत रूस की जनसंख्या संघ की अधिकांश अन्य इकाइयों की कुल जनसंख्या से अधिक है, राष्ट्रसभा में प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ा दी गई है, ताकि संघ की अन्य इकाइयों पर बड़ी इकाई की प्रधानता न हो जाए। बिस्मार्क के राज्य में भी यद्यपि जनसंख्या की दृष्टि से प्रशिया की प्रधानता थी, उसे संसद या राज्य सभा में उसके अधिकार से कम प्रतिनिधित्व (एक - तिहाई से कम) दिया गया था और उस संख्या का स्थायी