5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 187

170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

में 78 - 78 मत पड़े। इस बराबरी का केई समाधान नहीं हो पाया। काफी समय के बाद जब यही मसला कांग्रेस दल की बैठक में पेश हुआ तो 77 के मुकाबिले में हिन्दी के पक्ष में 78 मत पड़े। हिन्दी ने राष्ट्रभाषा का स्थान एक मत से जीत लिया। मैं यह तथ्य अपनी व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर प्रस्तुत कर रहा हूं, क्योंकि प्रारूप समिति के अध्यक्ष के नाते मुझे कांग्रेस दल के अहाते में प्रवेश करने का अधिकार था।

इन तथ्यों से पता चलता है कि दक्षिण को उत्तर से कितनी अरुचि थी। यदि उत्तर अखंड रहे और दक्षिण का विघटन हो जाए और यदि उत्तर भारत की राजनीति को विषम रूप से प्रभावित करता रहा, तो यही अरुचि घृणा का रूप भी धारण कर सकती है (देखें मानचित्र 1)।

किसी राज्य को केंद्र में इतनी प्रधानता देना खतरनाक है। श्री पणिक्कर ने विषय के इस पक्ष का भी निर्देश किया है। अपने असहमति लेख में वह कहते हैं :

इकाइयों की समानता के संघीय सिद्धांत की अस्वीकृति से उत्पन्न वर्तमान असंतुलन

का यह परिणाम हुआ कि उत्तर प्रदेश के इतर सभी राज्यों में अविश्वास और विद्वेष की

भावना उत्पन्न हो गई है। न केवल दक्षिणी राज्यों में, बल्कि पंजाब, बंगाल और अन्यत्र

भी आयोग के समक्ष यह विचार व्यक्त किया गया कि शासन के वर्तमान गठन के

फलस्वरूप अखिल भारतीय विषयों में उत्तर प्रदेश की प्रधानता हो गई है। इस भावना

के मौजूद होने से शायद ही कोई इन्कार कर सकेगा। कोई इस बात का भी खंडन

नहीं करेगा कि यदि इस प्रकार की भावनाएं बनी रहीं और उनका कोई उपचार आज

ही नहीं किया गया, तो इससे हमारी एकता को खतरा पैदा हो जाएगा।

उत्तर और दक्षिण में भारी अंतर है। उत्तर रूढि़वादी है, तो दक्षिण प्रगतिशील। उत्तर में अंधविश्वासी हैं, तो दक्षिण में बुद्धिवादी। दक्षिण शिक्षा की दृष्टि से आगे हैं, तो उत्तर पिछड़ा हुआ। दक्षिण की संस्कृति आधुनिक है, तो उत्तर की संस्कृति प्राचीन।

क्या प्रधानमंत्री नेहरू 15 अगस्त, 1947 को उस यज्ञ में नहीं बैठे थे, जो बनारस के ब्राह्मणों ने एक ब्राह्मण के स्वतंत्र और स्वाधीन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनने के उपलक्ष में किया था। क्या उन्होंने वह राजदंड ग्रहण नहीं किया था, जो उन ब्राह्मणों ने उन्हें दिया था और वह गंगाजल नहीं पिया था, जो वे लेकर आए थे?

ऐसी कितनी स्त्रियां हैं, जिन्हें हाल ही में सती होने और अपने मृत पतियों की चिता पर बलि हो जाने के लिए विवश नहीं किया गया? क्या हाल ही में राष्ट्रपति ने बनारस जाकर ब्राह्मणों की पूजा नहीं की थी, उनका पाद - प्रक्षलन करके जल - पान नहीं किया?

उत्तर भारत में अब भी सती - साध्वी और नंगे साधू मौजूद हैं। पिछले हरिद्वार मेले के अवसर पर नंगे साधुओं ने कैसा हंगामा किया था। क्या उत्तर प्रदेश में किसी ने उसका विरोध किया?