5. भाषावार राज्यों के संबंध में विचार - Page 213

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

प्रतिरक्षा की दृष्टि से यह व्यवस्था केंद्र सरकार को सुरक्षा प्रदान करेगी। उसकी भारत की सभी नगरों से समान दूरी है। इससे दक्षिण भारत के लोगों को भी यह संतोष होगा कि उनकी सरकार कभी उनके यहां भी रहती है। सरकार सर्दी के मौसम में और कुछ अन्य महीनों के दौरान हैदराबाद में रह सकती है। हैदराबाद में वे सभी सुविधाएं हैं, जो दिल्ली में उपलब्ध हैं, और यह दिल्ली से कहीं बेहतर शहर भी है। इसमें वह सारा वैभव विद्यमान है, जो दिल्ली में है। यहां इमारतें सस्ती हैं और सुन्दर भी, बल्कि दिल्ली से कहीं अच्छी हैं। वे सब बिकाऊ भी हैं। अगर कोई कमी है तो यह कि इसमें संसद भवन नहीं है, जो भारत सरकार बड़ी आसानी से बनवा सकती है। यह ऐसा स्थान है, जहां संसद साल भर बैठकर काम कर सकती हैं, जो उसके लिए दिल्ली में करना संभव नहीं है। मेरी समझ में नहीं आता कि हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाने में क्या आपत्ति हो सकती है। अच्छा हो यदि यह काम इसी समय हो जाए, जब हम राज्यों का पुनर्गठन कर रहे हैं।

हैदराबाद, सिकंदराबाद और बोलारम को मिलाकर भारत की दूसरी राजधानी बना दिया जाए। सौभाग्य की बात है कि ऐसा बड़ी आसानी से किया जा सकता है और इससे समस्त दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और आंध्र, सभी को संतोष होगा।

उत्तर और दक्षिण के बीच तनाव की स्थिति दूर करने का यह एक और उपाय है।