जातिप्रथा - उन्मूलन
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केवल इसलिए है कि मुझे ऐसे समय पर इतना कठोर परिश्रम करना पड़ा, जिसे मेरा स्वास्थ्य सहन नहीं कर सकता था।
आपका
भीमराव अम्बेडकर
इस पत्राचार से उन कारणों का पता चल जाएगा, जिनकी वजह से मंडल द्वारा अध्यक्ष के रूप में मेरी नियुक्ति रद्द की गई थी और पाठक यह जानने की स्थिति में होंगे कि इसका दोष किसको दिया जाना उचित है। मैं समझता हूं कि यह पहला अवसर है जब कि स्वागत समिति द्वारा किसी अध्यक्ष की नियुक्ति को इसलिए रद्द किया गया है, क्योंकि वह अध्यक्ष के विचारों का अनुमोदन नहीं करती। चाहे ऐसा हो या न हो, किन्तु निश्चय ही मेरे जीवन में यह पहला अवसर है, जब कि सवर्ण हिन्दुओं के किसी सम्मेलन की अध्यक्षता करने के लिए मुझे आमंत्रित किया गया था। मुझे अफसोस है कि एक त्रासदी में इसका अंत हुआ। किन्तु ऐसे कठोर संबंधों से कोई भी क्या आशा कर सकता है, जहां सवर्ण हिन्दुओं के सुधारवादी और अछूतों के आत्म - सम्मानी वर्ग के बीच संबंध इतने कठोर हों कि सवर्ण हिन्दुओं को अपने कट्टरपंथी साथियों से अलग होने की कोई इच्छा न हो और आत्म - सम्मानी अछूत वर्ग के पास सुधारों पर जोर देने के अलावा कोई विकल्प न हो।
राजगृह, दादर, बंबई.14,
15 मई, 1936
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