का नाम पंच-द्रविड़ है। लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि उत्तर की बिरादरी के ब्राह्मणों की पांच शाखाएं और दक्षिण के ब्राह्मणों की पांच शाखाएं उत्तर या दक्षिण भारत में रहने वाले ब्राह्मणों की सभी शाखाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। विषय को पूर्णता देने के लिए जरूरी है कि न केवल उनका उल्लेख किया जाए, बल्कि उनकी उप-शाखाओं को भी दर्ज किया जाए।
दक्षिण भारत के अन्य ब्राह्मण
इस श्रेणी में निम्नलिखित आते हैंः
(1) कोंकणी ब्राह्मण ख्1,, (2) हुबु ख्2,, (3) गौकर्ण ख्3,, (4) हाविका ख्4,,
(5) तुलवा ख्5,, (6) अम्मा कोडग ख्6,, (7) नम्बूद्री।
नम्बूद्री ब्राह्मण मलाबार में रहने वाले ब्राह्मणों के प्रमुख समूह हैं। नम्बूद्रियों के अलावा ब्राह्मणों की अन्य उप-शाखाएं भी हैं। वे हैंः
(1) पोट्टीस, (2) मुट्टाडूस, (3) फलीडस, (4) रामनाड-रिट परसहास,
(5) पट्टारास, (6) अम्बालवासीस।
अन्य राजपूत ब्राह्मण
जिन राजपूत ब्राह्मणों का उल्लेख गुर्जर ब्राह्मणों की सूची में नहीं किया गया है, वे हैंः
(1) श्रीमाली ब्राह्मण, (2) सचौदा ब्राह्मण, (3) पल्लीवार ब्राह्मण,
(4) नंदन ब्राह्मण, (5) पुष्कर ब्राह्मण, (6) पोखर सेवक ब्राह्मण,
(7) मेदातवाला, (8) पारिख ब्राह्मण, (9) लावना ब्राह्मण, (10) डकोत
ब्राह्मण, (11) गरुडिया ब्राह्मण, (12) अचारज ब्राह्मण, (13) बूड़ा ब्राह्मण,
(14) कपिदास, (15) दाहिमा, (16) खंडेलवाल, (17) दिवास,
(18) सिकवादास, (19) चमातवाल, (20) मरु, (21) श्रीवंत, (22) अभीर,
(23) भारतन, (24) सनकदास, (25) वागदी, (26) मेवादास, (27) राजगुरु,
(28) भाट, (29) चारण।
कोंकण ब्राह्मण महाराष्ट्र के कोंकणस्थों से अलग है। कोंकणी ब्राह्मण गोआ के पुर्तगाली प्रदेश के हैं।
वे कारवाड के हैं।
वे (पांडुलिपि में स्थान का उल्लेख नहीं है) के संपादक हैं µ संपादक।
वे तेल्लिचेरी के आस-पास पाए जाते हैं।
वे उडिपी के आस-पास पाए जाते हैं।
वे कुर्ग में पाए जाते हैं।