7. अस्पृश्यों का विद्रोह - Page 169

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

का भाव जगाया जाए। यह गौण उद्देश्य था। प्रमुख उद्देश्य था, हिंदू समाज-व्यवस्था पर करारा प्रहार। हिंदू समाज-व्यवस्था श्रम के विभाजन पर टिकी है। वह हिंदुओं के लिए स्वच्छ और सम्मानजनक धंधे आरक्षित करती है और घिनौने तथा घटिया धंधे अस्पृश्यों के मत्थे मढ़ती है। इस प्रकार यह हिंदुओं को यश का भागी बनाती है और अस्पृश्यों को अपयश के गर्त में धकेलती है। संकल्प, हिंदू, समाज-व्यवस्था की इस कुचेष्टा के विरुद्ध विद्रोह था। इनका उद्देश्य था कि हिंदू अपने घिनौने धंधे

खुद अपने हाथों से करें।

यह है, हिंदुओं की स्थापित व्यवस्था के विरुद्ध अस्पृश्यों के विद्रोह के इतिहास का संक्षिप्त विवरण। इसकी शुरुआत तो बंबई में हुई, पर यह भारत के सभी भागों में फैल गया है।