8. असहाय स्थिति - Page 170

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असहाय स्थिति

I. अस्पृश्यों के विद्रोह के प्रति हिंदुओं की प्रतिक्रिया,

II. निर्मम दमन के लिए अवैध साधन,

III. अस्पृश्यµएक कमजोर शक्ति,

IV . निर्लज्ज पक्षपाती अधिकार, और

V. अस्त्र को कुंठित कर दिया गया।

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अस्पृश्यों का विद्रोह बताता है कि किस प्रकार पुरानी व्यवस्था समाप्त हो रही है और नई व्यवस्था शुरू हो रही है। इस विद्रोह के प्रति हिंदुओं की क्या प्रतिक्रिया है? जो कोई इसके बारे में कुछ भी जानता है, वह बिना किसी संकोच के इस प्रश्न का उत्तर दे सकता है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि उनका रवैया विरोध का है। यह समझने में तो कठिनाई हो सकती है कि हिंदू क्यों विरोध करते हैं, लेकिन इस बारे में कोई शंका नहीं हो सकती है कि वे विरोध करते हैं।

किन कारणों से हिंदू अस्पृश्यों के इस अधिकार-संघर्ष का विरोध करते हैं, उन्हें समझना सरला हो जाएग, यदि सवर्ण हिंदुओं और अस्पृश्यों के वर्तमान संबंधों की कतिपय महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखा जाए।

जिस सर्वप्रथम तथा सर्वोपरि बात को सदैव याद रखन ही होगा, वह है स्पृश्यों और अस्पृश्यों के बीच की स्पष्ट विभाजन रेखा। हर गांव दो भागों में बंटा होता है, स्पृश्यों के घर और अस्पृश्यों के घर। भौगोकि दृष्टि से ये दोनों भाग बिल्कुल अलग होते हैं। सदा ही दोनों के बीच काफी दूरी होती है। किसी भी स्थिति में दोनों प्रकार के घर अगल-बगल नहीं होते और न ये पास ही होते हैं। अस्पृश्यों के घरों के नितांत अलग नाम होते हैं, जैसे महारवाड़ा, मांगवाड़ा, चमरोट्टी, खाटिकाना, आदि।