9. उनकी कामनाएं हमारे लिए कानून हैं - Page 189

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. ब्रह्म ने शूद्र के लिए एक ही कर्तव्य निर्धारित किया, अर्थात् इन अन्य व्यक्ति, सभी को श्रमिक समझना चाहिए। जो किसी के घर में जन्म प्राप्त करते हैं, वे दास होते हैं µ (वही, 1.91)

  2. विद्यार्थी, प्रशिक्षणार्थी, वेतन देकर नियुक्त सेवक और चौथे अधिकारी व्यक्ति, इन सभी को श्रमिक समझना चाहिए। जो किसी के घर में जन्म प्राप्त करते हैं, वे दास होते हैं µ (वही, 5.3)

  3. ट्टषियों के कानून के आधार पर पांच वर्ग के सेवक बताए गए हैं। इनमें चार वर्ग के सेवक हैं जिनका ऊपर वर्णन किया गया है। पांचवें वर्ग में दास आते हैं, जिनके 15 प्रकार हैं µ (वही, 5.2)

  4. जो (अपने स्वामी के) घर में उत्पन्न हुआ है, जो खरीदा गया है, जो उपहार में मिला है, जो विरासत में मिला है, जिसका अकाल के समय भरण-पोषण किया गया है, जो उसके वैध स्वामी द्वारा गिरवी के रूप में रखा गया है µ (वही, 5.26)

  5. जिसका भारी ट्टण चुकाकर मुक्त कराया गया है, जो युद्धबंदी है, जो दांव में जीता गया है, जो तपस्वी जीवन त्याग कर यह घोषित करता है, ‘मैं जो आपका हूं’, जो निश्चित अवधि के लिए दास है µ (वही, 5.27)

  6. जो जीविकोपार्जन के उद्देश्य से दास बनता है, जो दास स्त्री के साथ संबंध होने के कारण दास हो गया और जो स्वयं को बेच देता है। कानून के आधार पर ये 15 प्रकार के दास हैं µ (वही, 5.28)

  7. इनमें से प्रथम चार श्रेणी के दास स्वामी की सहमति के बिना मुक्त नहीं किए जा सकते। उनका दासत्व वंशानुगत है µ (वही, 5.29)

  8. ट्टषियों का कथन है कि ये सभी एक जैसे पराधीन होते हैं, परंतु इनका स्तर और इनकी आय इनकी विशिष्ट जाति और व्यवसाय पर निर्भर करती हैं µ (वही, 5.4)

II. वे जो चातुर्वर्ण्य की परिधि से बाहर हैं µ उनकी उत्पत्ति और कर्म

  1. इस पृथ्वी पर जो भी जातियां उस समुदाय से अलग रखी गई हैं जो मुख, बाहु, जंघा और (ब्राह्मण) के पैरों से जन्मी हैं, वे दस्यु कहलाती हैं, जो चाहे म्लेच्छों (बर्बर जातियों) की भाषा बोलती हों या आर्यों की µ (मनु, 10.45)

  2. ये जातियां प्रसिद्ध वृक्षों और श्मशान भूमि के निकट या पर्वतों पर और झाडि़यों के पास निवास करें, (कुछ चिर्िंं से) जानी जाएं और अपने विशिष्ट व्यवसाय से जीविकोपार्जन करें µ (मनु, 10.50)