9. उनकी कामनाएं हमारे लिए कानून हैं - Page 191

176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की परिधि में हैं, उन सबका स्तर भी समान नहीं है। चातुर्वर्ण्य के भीतर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र तथा गुलाम हैं और उन सबका दर्जा समान नहीं है। फिर भी वे चातुर्वर्ण्य के भीतर हैं। जो चातुर्वर्ण्य के भीतर हैं, मनु के कानून की नजर में उनका दर्जा है और लोगों की नजर में उनका सम्मान है। जो उसके भीतर नहीं हैं, लोगों की दृष्टि में उनका कोई सम्मान नहीं है। नागरिकता का भी अंतर हैं जो चातुर्वर्ण्य के भीतर हैं, वे अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं और उन्हें लागू करवा सकते हैं। जो उसके भीतर नहीं हैं, उनके पास न अधिकार हैं और न ही उन्हें लागू करवाने का उपाय।

चातुर्वर्ण्य के भीतर वालों और उसके बाहर वालों के बीच का यह अंतर उस अंतर से मिलता-जुलता है, जो प्राचीन रोम के कानून के अनुसार नागरिकों के बीच, यानी नागरिकों और गैर-नागरिकों के बीच था। रोम का प्राचीन कानून मूलतः व्यक्तिपरक था, राज्य-क्षेत्रपरक नहीं। व्यक्ति को उसकी संस्थाओं और उनकी सुरक्षा का लाभ इसलिए नहीं मिलता था कि वह रोम के राज्य-क्षेत्र के भीतर निवास करता था, बल्कि इसलिए मिलता था कि वह एक ऐसा नागरिक था कि उसी के द्वारा तथा उसी के लिए रोम का कानून बनाया गया था। प्राचीन अंतर्राष्ट्रीय कानून यह था कि किसी विदेशी राज्य की सीमा में निवास करने वाला व्यक्ति उस राज्य तथा उसके नागरिकों की दया पर निर्भर करता था। उसके साथ गुलाम जैसा व्यवहार किया जा सकता था। कोई भी प्रथम आगंतुक उसका सर्वस्व हरण कर सकता था, क्योंकि वह कानून के घेरे से बाहर था। दीवानी कानून के अधीन रोम के नागरिक के निराले व्यक्तिगत अधिकारों का सार केवल तीन गूढ़ शब्दों में उडेल दिया गया। वे हैं µ कोनुबियम, कोमर्कियम और एक्टियो। कोनुबियम विवाह करने की क्षमता थी, जिससे संगोत्रता और सपिंडता का उद्भव होता है। इन्हीं पर बिना वसीयत उत्तराधिकार, संरक्षकता आदि की नींव पड़ी। कोमर्कियम संपत्ति के अर्जन अथवा उसके हस्तांतरण की क्षमता थी। एकिटयो वह क्षमता थी, जिसके अनुसार अदालत का द्वार खटखटाया जा सकता है। उसके अधीन क्षतिपूर्ति और सुरक्षा या ऐसे अधिकार ने प्रवर्द्धन के लिए दावा किया जा सकता है, जो कोनुबियम अथवा कोमर्कियम ने दिया हो या उसमें शामिल हो या जिसे सीधे कानून ने दिया हो। इन तीनों क्षमताओं का लाभ केवल रोम के नागरिक उठा सकते थे। गैर-नागरिक को इनमें से कोई भी अधिकार प्राप्त नहीं था।

III

चातुर्वर्ण्य के भीतर वालों तथा उसके बाहर वालों के बीच का यह विभाजन यद्यपि वास्तविक और बुनियादी है, पर निश्चय ही यह परिभाषा पुरानी है। चातुर्वर्ण्य