उनकी कामनाएं हमारे लिए कानून हैं
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व्यवस्था अब कानून के रूप में प्रचलित नहीं है। अतः चातुर्वर्ण्य के भीतर और उसके बाहर वाली जातियों की बात कहना कुछ सिद्धांत बघारने जैसी बात होगी। प्रश्न उठेगा कि इन प्राचीन वर्णों के आधुनिक प्रतिरूप क्या है? प्रश्न पूर्णतः इसलिए उचित है कि मुझे विशेषतः यह स्पष्ट करना है कि किसी प्रकार मनु का प्राचीन कानून हिंदुओं की वर्तमान अराजकता के लिए जिम्मेदार है। भले ही मैं इस परिभाषा को पुरानी कह रहा हूं, लेकिन दो बातें दर्शा देंगी कि मेरी यह धारणा सही है। एक तो यह कि मनु के प्राचीन सामाजिक विभाजनों के प्रतिरूपों का अभाव आधुनिक-काल में नहीं है। उन प्राचीन विभाजनों के आधुनिक प्रतिरूप हैं, हिंदू और अस्पृश्य। चातुर्वर्ण्य में मनु ने जिन लोगों को शामिल किया, उनका प्रतिरूप हिंदू नामक आधुनिक मिश्रित वर्ग हैं। जिन्हें मनु ने बाह्य (चातुर्वर्ण्य से बाहर) कहा, उनका प्रतिरूप भारत के वर्तमान अस्पृश्य हैं। चातुर्वर्ण्य में शामिल चार वर्णों-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र के बीच की विभाजन रेखा आधुनिक-काल में कुछ धुंधली पड़ गई है और वे कुछ हद तक आपस में घुलने-मिलने लगे हैं। लेकिन चातुर्वर्ण्य के भीतर वालों तथा उसके बाहर वालों के बीच जो विभाजन रेखा मनु ने खींची थी, वह आज भी स्पष्ट है और उसे न तो मिटाने और न ही उसका उल्लंघन करने की इजाजत है। यही वह रेखा है, जो आज हिंदुओं को अस्पृश्यों से अलग करती है। यह एक बात तो स्पष्ट है कि प्राचीन विभाजन छनकर आधुनिक-काल में आ गए हैं। परिवर्तन केवल नामों का है।
दूसरा प्रश्न है कि मनु के ‘बाह्यों’ के लिए जिस कानून की व्यवस्था की है, क्या उसका कोई प्रतिरूप हिंदुओं और अस्पृश्यों के वर्तमान सामाजिक संबंधों में मौजूद है? जिन्हें इस बारे में संशय है, उनसे मेरा निवेदन है कि वे निम्न मामलों पर विचार करेंगे। घटना मद्रास प्रेसिडेंसी के रामनाड जिले की है।
दिसंबर 1930 में रामनाड के कल्लारों ने आठ प्रतिबंधों का फतवा दिया। उनकी अवहेलना के कारण कल्लारों ने अस्पृश्यों के खिलाफ हिंसा का प्रयोग किया। अस्पृश्यों की झोंपडि़यों में आग लगा दी गई और उनके अन्न भंडारों तथा संपत्ति को नष्ट कर दिया गया। उनके मवेशी लूट लिए गए। ये आठ प्रतिबंध इस प्रकार थेः
आदि-द्रविड़ों की स्त्रियां सोने व चांदी के जेवर नहीं पहनेंगी,
उनके मर्द अपने घुटनों से नीचे और कूल्हों से ऊंचे वस्त्र धारण नहीं
करेंगे,
- उनके मर्द कोट, कमीज या बनियान नहीं पहनेंगे,