15. अस्पृश्यों का ईसाईकरण - Page 364

15

अस्पृश्यों का ईसाईकरण

I. भारत में ईसाई धर्म का विकास,

II. धर्म-प्रसार में लगाया गया समय तथा पैसा, और

III. मंद विकास के कारण।

I

भारत में ईसाई धर्म कितना पुराना है? भारतवासियों में उसने कितनी पैठ की है? जो भी अस्पृश्यों में रुचि रखता है, वह इन प्रश्नों को पूछने से नहीं चूकेगा। ये दो प्रश्न इतने गहरे जुड़ हैं कि ईसाई धर्म के प्रसार का प्रयास निरर्थक होता, यदि भारत में अस्पृश्यों का इतना विशाल समूह न होता, जो अपनी निजी परिस्थितियों के कारण ईसाई धर्म का सामाजिक संदेश सुनने के लिए सबसे अधिक तत्पपर हैं।

निम्न आंकड़ों से कुछ अंदाजा हो जाएगा कि 1931 की जनगणना के अनुसार भारत में अन्य संप्रदायों के मुकाबिले भारतीय ईसाईयों की संख्या कितनी थी।

भारत तथा बर्मा

धर्मवार आबादी जनगणना जनगणना जनगणना वृद्धि$

(1891) (1921) (1931) कमी- (1) (2) (3) (4) (5) हिंदू - 216,734,586 239,195,140 $10.4 मुस्लिम - 68,735,233 77,677,545 $13 बौद्ध - 11,571,268 12,786,806 $10.5 सिख - 3,238,803 4,335,771 $33.9