350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(1) (2) (3) (4) (5) आदिम धर्म - 9,774,611 8,280,347 -15.3 ईसाई - 4,754,064 6,296,763 $32.5 जैन - 1,178,596 1,252,105 $6.2 पारसी - 101,778 109,752 $7.8 यहूदी - 21,778 24,141 $10.9 असूचित - 18,004 2,860,187 ... कुल योग 316,128,721 352,818,557 $10.6
यह सच है कि 1921 और 1931 के दौरान ईसाई धर्म में भारी वृद्धि दिखाई है। वृद्धि की दृष्टि से सिख धर्म का स्थान प्रथम है। दूसरा स्थान ईसाई धर्म का है और धर्म-प्रचार करने वाले एक अन्य धर्म इस्लाम का स्थान तीसरा है। पहले और दूसरे स्थान में अंतर इतना थोड़ा है कि धर्म द्वारा प्राप्त दूसरे स्थान को प्रथम स्थान जैसा ही माना जा सकता है। फिर, दूसरे और इस्लाम द्वारा प्राप्त तीसरे स्थान के बीच अंतर बड़ा है कि ईसाई इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि उन्होंने इतने बड़े प्रतिद्वंदी को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
इसके बावजूद तथ्य यह है कि 6,296,763 की यह संख्या कुल संख्या 352,818,557 में से है। इसका अर्थ है कि भारत में ईसाईयों की आबादी कुल आबादी की लगभग 1.7 प्रतिशत है।
II
वह भी कितने समय में और कितने व्यय के बाद? जहां तक व्यय का संबंध है, कोई सही आंकड़ा नहीं दिया जा सकता। श्री जार्ज स्मिथ ने 1893 में ‘दि कनवर्जन ऑफ इंडिया’ (भारत का धर्म-परिवर्तन) पर अपनी पुस्तक प्रकाशित की थी। उसमें दिए गए आंकड़ों से कुछ आभास उन साधनों का लग जाता है, जिनका उपयोग गैर-ईसाई देशों में धर्म-प्रचार के लिए ईसाई देशों ने किया था। उन्होंने कहा हैः
विशेषतः पूर्वी चर्चों वाले एशिया तथा उत्तरी अफ्रीका के उन प्रदेशों में जिन्के
लिए अधिकांश प्रयास अमरीका करते हैं, हम उनके सशक्त तथा आवश्यक
प्रयासों की गणना नहीं करते। न ही हम विशुद्ध आस्था और जीवन-शैली वाले