3. हिंदू समाज की आधार-शिला - Page 96

हिंदू समाज की आधार-शिला 81

वाणी को किसने सुना, ईश्वर ने अपनी वाणी किसे सुनाई? हिंदू के पास कोई उत्तर नहीं है। वह उस व्यक्ति का नाम नहीं बता सकता, जिसने ईश्वर की वाणी को सुना हो। स्वयं वेदों में इस बात का उल्लेख है कि किन-किन मंत्रों की रचना किन-किन ट्टषियों ने की है। लेकिन हिंदू यह नहीं कहेंगे कि वेदों में निहित ईश्वर की अमुक वाणी को अमुक व्यक्ति ने सुना। यह अंतर वेदों के पवित्र स्वरूप को व्यापक संरक्षण प्रदान करता है, क्योंकि पवित्र ग्रंथ के रूप में ‘बाइबिल’ की आलोचना मूसा या यीशु के चरित्र की आलोचना करके की जा सकती है। इसी प्रकार पवित्र ग्रंथ के रूप में ‘कुरान’ की आलोचना मुहम्मद के चरित्र की अलोचना करके की जा सकती है। लेकिन वेदों की आलोचना संदेशवाहक या संस्थापक के चरित्र की आलोचना करके नहीं की जा सकती। इसका सीधा-सा कारण है कि कोई ऐसा व्यक्ति है ही नहीं।

जैसा कि मैं बता चुका हूं, धर्म ही वह चट्टान है, जिस पर हिंदुओं ने अपनी व्यवस्था का भवन खड़ा किया है। अब यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह कोई साधारण कोटि की कठोर चट्टान नहीं है। यह तो ग्रेनाइट की चट्टान है।