1 साम्राज्यवादी व्यवस्था : इसका विकास और ह्रास - Page 100

साम्राज्यवादी व्यवस्थाः इसका विकास और ”ास 85

अंतर सामान्यतः वर्तमान जैसा ही रहेगा।’’ ख्1,

उगाहे गए कुल राजस्व का लगभग दस प्रतिशत भाग न्यायिक और पुलिस खर्चों पर व्यय होता था जिसे केवल सुरक्षात्मक कह सकते हैं। इस प्रकार कष्टदायी करों द्वारा उगाही गई राशि का अधिकांश भाग अनुत्पादक तरीकों से खर्च किया गया। युद्ध की एजेंसियों की शांति स्थापना के नाम पर घोषणा की जाती थी और इन एजेंसियों ने कुल निधियों के बड़े भाग का उपभोग कर लिया। विकास के लिए बनी एजेंसियों के लिए वस्तुतः कुछ भी शेष नहीं बचा। शिक्षा पर कुछ भी व्यय नहीं किया गया और उपयोगी लोक निर्माण कार्यों पर भी बहुत कम खर्च किया गया। साम्राज्यवादी अथवा केन्द्रीय बजट से लंबी अवधि तक रेलवे, सिंचाई अथवा समुद्री परिवहन के लिए नहरों की खुदाई तथा व्यापार एवं उद्योग के विकास से जुड़े अन्य कार्यों के लिए कोई स्थान नहीं था। 8,37,000 वर्ग मील के कुल क्षेत्र में से मात्र कुछ मील तक ही रेलवे लाइन बिछाई गई थी। 2,157 मील क्षेत्र में ही सड़क निर्माण हुआ था। केवल 580 मील तक ही समुद्री रास्ता तैयार किया गया था और मात्र 80 मील तक ही तार सुविधा उपलब्ध थी। अथवा यदि खर्च की गई राशि के संदर्भ में बात करें तो हम पाते हैं कि 1837-38 से 1851-52 तक के 15 वर्षों की अवधि के दौरान उत्पादक व्यय कुल 299,732 पौंड वार्षिक रहा। ख्2, किसानों को यह सिद्धांत भलीभांति पता है कि खाद के अभाव में लगातार खेती करने से मिट्टी की ताकत नष्ट हो जाती है। यद्यपि इसके व्यापक उपयोग हो सकते हैं और

  1. डिस्पैच टू बंगाल, नं. 44 दिनांक 10, 1834, पैरा 107

*. तीन प्रेसीडेंसियों के देशी संस्थानों के विषय में नागरिक वित्त समिति (सिविल फायनेंस कमेटी) की

रपट, बंगाल फायनेंसियल कन्सलटेशन्स, अप्रैल 13, 1830, इंडिया ऑफिस रिकार्ड। विभिन्न प्रांतों में अध

ीनस्थ संस्थानों में कार्यरत ईसाई और देशी कर्मचारियों को कमेटी (समिति) ने चार श्रेणियों में विभक्त

किया था यथा (1) हैडक्लर्क, रजिस्ट्रार, मैनेजर और उनके सहायक, एक्जामिनर, पूंजी निवेशक, आदि

जो कार्यालय के कार्य संचालन निर्देशन के उत्तरदायी सचिवों के अधीन थे (2) चालू व्यापार लेखक

(मुनीम), नकल नवीस (3) ठेके पर कार्य करने वाले नकल नवीस (4) सभी छोटे-मोटे कर्मचारी।

समिति ने यह महसूस कियाः

पैरा 35ः चालू व्यापार लेखक (मुनीम) को कलकत्ता में जो वेतन मिलता है उसमें 20 से 30 रुपये

प्रतिमाह का अंतर है। जबकि एक व्यक्ति का औसत 104 रुपये आता है। बंबई में 15 से 120 रुपये,

मद्रास में 48 रुपये का औसत आता है, जबकि उस प्रेसीडेंसी के सचिवालय में एक नौकर का औसतन

वेतन साढ़े सत्ताईस रुपया है। जबकि 10 ½ रुपये से लेकर 87 ½ रुपये तक विभिन्न दरों पर भुगतान

का प्रचलन है। जोकि व्यक्ति की सेवा अवधि और उपयोगिता पर आधारित है। * बंगाल के सचिवालय कार्यालय में एक सैंक्शनर को 750 शब्दों के लेखन पर एक रुपया, जबकि अन्य

दो प्रांतों में 1333 शब्दों के लिए रुपया दिया जाता है।

पैरा 51ः बंगाल सचिवालय में एक कर्मचारी को 1142 रुपये प्रतिमाह, मद्रास में ‘‘मोची’’ (जूता बनाने

वाले) सहित 455 रुपये और बंबई में 261 रुपये दिए जाते हैं। बंगाल में 186, मद्रास में 56 और बंबई

में 42 कर्मचारी थे।

  1. ब्रिटिश भारत से संबंधित सांख्यिकीय विवरणः थार्नटन द्वारा संपादित, 1853।