प्रांतीय वित्त व्यवस्था (बजट) : इसका विकास - Page 127

112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नियत (प्रांतीय) बजट

‘‘...अपनी बुद्धिमता के कारण लार्ड मेयो ने वित्तीय घाटे और उतार-चढ़ाव का कारण साम्राज्यवादी सरकार की अयोग्यता और प्रांतीय सरकारों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार में ढूंढ निकाला और वह इस नतीजे पर पहुंचे कि प्रांतीय बजट व्यवस्था आरंभ करने से समस्या का समाधान उसकी विकृति के समान ही होगा। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि स्थिति अभी भी साम्राज्यवादी हितों के पक्ष में थी और जबकि हर कोई किसी के हितों की बलि चढ़ा कर ऐसा नहीं करना चाहता था। यहां तक कि लार्ड मेयो भी साम्राज्यवादी हितों के प्रति झुकाव से मुक्त नहीं थे। लेकिन भ्रामक स्थितियों के बढ़ते दबाव ने उन्हें भी चली आ रही अनिर्णय और असमंजस की स्थिति से गुजरने पर मजबूर कर दिया, हालांकि प्रांतीय बजट के प्रारूप को तय करने में उन्होंने फूंक-फूंक कर कदम उठाए।’’

µडॉ. भीमराव अम्बेडकर