निर्दिष्ट राजस्व बजट
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वर्ष नियतन उत्पाद शुल्क, कानून और वास्तविक
न्याय से प्राप्त वास्तविक रास्व में नियतन
रु. बढ़ोतरी का घटाया गया हिस्सा (रु.) रु. 1877-78 65,70,000 107,000 64,63,000 1878-79 53,40,000 85,000 52,55,000 1879-80 53,10,000 - 53,10,000
ध्यान देने योग्य है कि मद्रास सरकार ने निर्दिष्ट राजस्व के नए सिद्धांत पर आधारित प्रांजीय बजट की जिम्मेदारी उठाने से मना कर दिया। उसने पुरानी व्यवस्था में रहना ही पसंद किया। इस अध्याय में असम और बर्मा के प्रांतीय बजट शामिल नहीं हैं चूंकि उनकी संरचना में निहित सिद्धांत का अध्ययन अगले अध्याय में हुआ है। अतः उन्हें अभी शामिल करना उचित नहीं समझा गया।
प्रांतीय बजट के विकास के दूसरे चरण का अध्ययन समाप्त करने से पहले यह जान लेना उचित होगा कि प्रांतीय सरकारों को मिली उचित सहायता तथा साम्राज्यवादी कोष को हुए फायदे की दृष्टि से इसके परिणाम कैसे रहे। प्रांतों को मिली उचित सहायता की दृष्टि से इस चरण के परिणाम निम्न हैंःµ
प्रांत वार्षिक बचत या घाटा (पौंड)
1877-78 1878-79 1879-80 1880-81 1881-82
(पौंड) (पौंड) (पौंड) (पौंड) (पौंड) सी.पी. (केन्द्रीय प्रांत) 5,992 7,049 -28,133 2,956 95,221 बंगाल 173,380 158,732 82,523 -11,313 2,55,189 उत्तर पश्चिमी
प्रांत तथा अवध 4,469 237,100 320,729 280,790 667,613 पंजाब 18,578 48,195 7,017 59,497 135,979 बंबई -609,672 61,249 -11,201 37,855 418,783
भारत सरकार के वित्त एवं राजस्व लेखा से संकलित
इससे स्पष्ट है कि साम्राज्यवादी सरकार द्वारा दी गई निधियों को छोड़कर बाकी सभी प्रांतीय बजटों में शामिल सेवाओं को चलाने के उद्देश्य के लिए काफी ही नहीं थीं बल्कि खर्चे के बाद राजस्व की बचत भी होती थी। प्रांतीय सरकारों द्वारा अपनी पूंजी को नुकसान पहुंचाए किना साम्राज्यवादी सरकार को वर्ष 1879-80 और 1880-81 में दी गई सहायता से सिद्ध होता है कि प्रांतों के पास काफी धन था। सन्