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सांझा राजस्व बजट

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इस तथ्य को स्वीकार कर लेना चाहिए कि प्रांतों के वित्तीय व्यवस्थापन इस अवधि में जब बंदोबस्त समाप्तप्राय था अकाल और प्लेग फैलने से बुरी तरह प्रभावित हुए। इन दोनों दैवी आपदाओं का सामना करने के लिए प्रांतों ने जो व्यय किया उसने सबके संसाधनों में कमी की और मध्य प्रांत तथा उत्तर पश्चिम प्रांतों को लगभग दिवालिया बना दिया, जिससे कि भारत सरकार ने उनके संतुलन के लिए वर्ष 1896-97 में निम्न अंशदान की मदद करके प्राण रक्षा कीःµ

मध्य प्रांत (सी.पी.) को 526 लाख रुपए

उत्तर पश्मि प्रांत और अवध को 1,609 लाख रुपए

1896-97 का संशोधन

प्रांतीय वित्त में जो ”ास आ गया था उसे कम से कम किसी हद तक 1896-97 के संशोधित बंदोबस्त में प्रांतों के व्यय और राजस्व को एक उच्च स्तर प्रदान करके जो सन् 1892 में उन्हें स्वीकृत किया गया था दूर कर दिया गया।

निम्न तालिका में पुराने और नए व्यय स्तर को उनके अंतर की प्रतिशतता के साथ दर्शाया गया हैःµ

प्रांत मानक शुद्ध व्यय वृद्धि प्रतिशत

रु. रु.

सी.पी. 653,300 710,700 8.8 लोअर बर्मा 1,064,600 1,206,100 13.3 असम 467,600 564,900 20.8 बंगाल 2,816,700 3,125,500 10.9 उत्तर पश्चिम प्रांत 2,215,400 2,428,700 9.6 पंजाब 1,384,600 1,537,300 11.0 मद्रास 2,054,800 2,238,600 8.9 बंबई 2,049,500 2,544,100 5.6 योग 13,066,500 14,355,900 9.9

इस नए और बढ़े हुए व्यय स्तर के फलस्वरूप साम्राज्यवादी और प्रांतीय सरकारों के संयुक्त राजस्व के अंशदान के संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई। लेकिन इस संशोधन का क्रियान्वयन इस प्रकार करना था कि इससे प्रांतों को संसाधनों का अधिक हिस्सा मिले और यह जहां तक संभव हो निश्चित आबंटन