6 सांझा राजस्व बजट - Page 195

180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस प्रकार भारत सरकार को अकाल की कीमत ही नहीं चुकानी पड़ी, वरन् संतुलन स्थापित करने के लिए और उस समय की असाधारण परिस्थितियों में प्रांतीय सरकारों द्वारा आवश्यक सेवाओं में रुकावट या कमी कर दिए जाने पर उन्हें पुनः चालू करने के लिए धन की व्यवस्था भी करनी पड़ी।

साम्राज्यवादी सरकार ने यह सब मदद उपलब्ध कराई, वह इसलिए भी कि उस पूरे समय में साम्राज्यवादी वित्त की स्थिति बहुत ही समृद्धि की थी। यद्यपि यह अच्छा होता है कि सामान्य तौर पर सरकारें हमेशा अभावग्रस्त रहें, लेकिन साम्राज्यवादी वित्त में लाभ एक सामयिक संसाधन सिद्ध हुआ और उसका उपयोग दुगना प्रशंसनीय था, जिस तरीके से यह खर्च किया गया। लाभकारी सार्वजनिक निर्माण कार्यों को सम्पन्न करने हेतु अनुदान प्रदान करने के साथ-साथ साम्राज्यवादी सरकार के अनावश्यक कोष को प्रांतों के निम्नलिखित अतिरिक्त राहतकार्यों पर व्यय किया गयाःµ

  1. 50,94,000 रुपये के साम्राज्यवादी भू-राजस्व की छूट और 59,81,000 रुपये

प्रांतों को उनके हिस्से की अदायगी हेतु, कुल राशि 1,10,75,000 रुपये।

  1. मध्य प्रांत में 7,000 रुपये वार्षिक के पंधारीकर की समाप्ति।

  2. अजमेर में पटवारी दर में 10 प्रतिशत के राजस्व से घटाकर 6 ¼ प्रतिशत की

गई, स्थानीय राजस्व में प्रतिशत धनराशि 13,000 रुपए थी, लेकिन स्थानीय

निधि में जो अंशदान प्रदान किया गया वह 23,000 रुपये था। ख्1, प्रांतीय राजस्व

की मदद के लिए इस सब अंशदान को दृष्टिगत रखते हुए निम्नलिखित

तालिका प्रस्तुत की जा रही है जो बंदोबस्त अवधि के दौरान थी, प्रांतीय

वित्त स्थिति को दर्शाती हैःµ

  1. भारत सरकारः वित्तीय लेखा 1902-3, पैरा 146