सांझा राजस्व बजट
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जैसे अधिक उन्नत प्रांतों के साथ कम उदार रवैया अख्तियार किया। पिछड़े प्रांतों के मुकाबले इसने उनको आनुपातिक दृष्टि में कुछ कम व्यय बढ़ाने की इजाजत प्रदान की, जैसाकि ऊपर उदाहरण दिया जा चुका है और उनके राजस्व के हिस्से में थोड़ी कमी कर दी गई।
इस संशोधन से साम्राज्यवादी कोष को व्यावहारिक तौर पर नगण्य लाभ हुआ। सन् 1877 में कटौती करके इसको इस वर्ष में पूर्ण लाभ 40 लाख का हुआ। सन् 1882 में साम्राज्यवादी सरकार इतनी भारी समृद्ध थी कि बजाय लाभ प्राप्ति के उसने 26 लाख वार्षिक का साम्राज्यवादी राजस्व राज्यों को सौंप दिया। लेकिन 1889 में इसने 63 लाख और 1892 में 46 लाख की धनराशि फिर से प्राप्त की। इस अवसर पर यद्यपि लाभ नगण्य था, क्योंकि जो कुछ भी उसने उन्नत प्रांतों से हासिल किया था उसे पिछड़े प्रांतों को दे दिया।
यद्यपि बंदोबस्त की शर्तें न्यायोचित और उदार थीं लेकिन असामान्य स्थितियों ने पूरे बंदोबस्त काल को गड़बड़ा दिया था। प्रांतीय संसाधनों पर ऐसी भारी मांगें थोप दी गई थीं जो यद्यपि काफी थीं, लेकिन उनसे प्रांतों की जरूरतें पूरी नहीं हो सकती थीं। सन् 1896 और 1897 के अकाल ने सभी प्रांतों को कमोबेश मात्रा में प्रभावित किया। उत्तर पश्चिम प्रांत और अवध, मध्य प्रांत और बर्मा में अकाल की छाया का असर बहुत ही गंभीर था। मद्रास, बंगाल और पंजाब में यह चिंताजनक था। बर्मा में थोड़ा कम था। दूसरी ओर 1899 और 1900 का अकाल बंबई और मध्य प्रांत में बहुत गंभीर था। पंजाब में बहुत चिंताजनक और शेष प्रांतों में इसका असर थोड़ा कम था। और असम यद्यपि इन दोनों ही अकालों के प्रभाव क्षेत्र से मुक्त था लेकिन सन् 1897 के जून में उसे भीषण भूकंप का सामना करना पड़ा। अकाल के साथ-साथ प्लेग ने भी भीषण तबाही मचाई और जन-धन की हानि हुई। इन अदृश्य प्राकृतिक प्रकोपों की रोकथाम की कार्यवाहियों पर सभी प्रांतों को असाधारण व्यय करने की मजबूरी झेलनी पड़ी जिसका बंदोबस्त के समय के मानक निर्धारित राजस्व में पहले से किसी भी प्रकार का प्रावधान नहीं किया गया था। इन अदृश्य प्राकृतिक आपदाओं पर असाधारण प्रकृति का जो व्यय हुआ उसे साम्राज्यवादी सरकार ने झेला और उसकी अदायगी साम्राज्यवादी खजाने से हुई, लेकिन यह आड़े वक्त की मदद जरूरतों को देखते हुए बराबर की सिद्ध नहीं हुई, और भारत सरकार को प्रांतीय राजस्व में विशेष अनुदान के लिए बाध्य होना पड़ा जैसा कि आगे तालिका (पृ. 184) में दर्शाया गया है।